ADNOC Vessels Attack: हॉर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों पर फिर हुआ मिसाइल हमला, बढ़ रहा है तनाव

Praggya Singh sabal8 August 20262 min read79 viewsUAE
ADNOC Vessels Attack: हॉर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों पर फिर हुआ मिसाइल हमला, बढ़ रहा है तनाव

हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में लगातार हो रहे हमलों के कारण समुद्री सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। अबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी (ADNOC) ने आधिकारिक तौर पर इस बात की पुष्टि की है कि उनके जहाजों को मिसाइल और ड्रोन हमलों का निशाना बनाया गया है। इस हफ़्ते हुई कई घटनाओं के बाद पूरे क्षेत्र में तनाव का माहौल है, जो वहां काम करने वाले प्रवासियों और समुद्री व्यापार के लिए एक गंभीर स्थिति पैदा कर रहा है।

हालिया हमले और सुरक्षा की स्थिति

शनिवार, 8 अगस्त 2026 की सुबह जब ADNOC का एक जहाज इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से गुजर रहा था, तब उसे एक मिसाइल से निशाना बनाया गया। गनीमत रही कि इस हमले में कोई घायल नहीं हुआ और स्थिति को जल्द ही नियंत्रण में ले लिया गया। इससे पहले शुक्रवार, 7 अगस्त 2026 को भी यह पुष्टि की गई थी कि हफ्ते की शुरुआत में कंपनी के तीन जहाजों पर हमले किए गए थे।

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इस पूरे संघर्ष की शुरुआत से अब तक कुल 15 ADNOC जहाजों को मिसाइल और ड्रोन हमलों का सामना करना पड़ा है। इन दुखद हमलों के कारण अब तक एक कर्मी की मौत हो चुकी है, जबकि 20 लोग घायल हुए हैं। ADNOC ने इन हमलों को बिना किसी उकसावे के की गई कार्रवाई बताया है और कहा है कि इससे कंपनी के कामकाज पर बहुत बुरा असर पड़ा है।

क्या कहते हैं समुद्री सुरक्षा के आंकड़े

अबू धाबी की इस सरकारी कंपनी ने साफ तौर पर कहा है कि वह अपने कर्मचारियों की सुरक्षा और संपत्ति की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। कंपनी ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मांग की है कि समुद्री जहाजों की आवाजाही को पूरी तरह सुरक्षित रखा जाए और अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों में व्यावसायिक गतिविधियों में कोई बाधा नहीं आनी चाहिए।

फिलहाल, अंतरराष्ट्रीय समुद्री एजेंसियां स्थिति पर पैनी नजर बनाए हुए हैं। ज्वाइंट मैरीटाइम इंफॉर्मेशन सेंटर (JMIC) ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य के लिए SEVERE यानी गंभीर खतरे का अलर्ट जारी किया है, क्योंकि वहां लगातार जानबूझकर हमले होने की आशंका बनी हुई है। इसके अलावा, यूके मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस (UKMTO) की रिपोर्ट बताती है कि इस रूट पर व्यापारिक जहाजों की आवाजाही पहले के मुकाबले 90 फीसदी तक कम हो गई है। इसका सीधा असर खाड़ी देशों में काम करने वाले उन लोगों पर भी पड़ सकता है जो समुद्री व्यापार और तेल क्षेत्र से जुड़ी सेवाओं में कार्यरत हैं।

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