Al Jazeera Documentary: लेबनान के सिविल डिफेंस लीडर अली सफिद्दीन की दर्दभरी कहानी पर बनी फिल्म.

Nura Basta21 August 20263 min read82 viewsWorld
Al Jazeera Documentary: लेबनान के सिविल डिफेंस लीडर अली सफिद्दीन की दर्दभरी कहानी पर बनी फिल्म.

लेबनान में जारी संघर्ष के बीच अल जजीरा की एक नई डॉक्यूमेंट्री ने वहां के हालात को बहुत करीब से दिखाया है। इस फिल्म का नाम 'The Ones We Couldn’t Save' है, जो दक्षिणी लेबनान के Tyre शहर में सिविल डिफेंस के प्रमुख Ali Safiuddin की जिंदगी और उनके काम पर आधारित है। इस डॉक्यूमेंट्री में उनके दशकों पुराने सेवा कार्यों को दिखाया गया है, साथ ही उस दर्द को भी बयां किया गया है जो उन्होंने क्षेत्रीय संघर्षों के दौरान झेला है। आम लोग इस फिल्म के जरिए लेबनान के जमीनी हालात को बहुत आसानी से समझ पा रहे हैं कि कैसे एक फर्स्ट Responder अपने देश के लोगों की जान बचाने के लिए हर दिन अपनी जान जोखिम में डालता है।

परिवार और साथियों का खोना

Ali Safiuddin के जीवन में कई ऐसे दर्दनाक मोड़ आए जिन्होंने उन्हें अंदर तक झकझोर दिया। साल 2006 में एक इजरायली हमले के दौरान उनकी एक साल की बेटी Lynn की मौत हो गई थी। वह हमला उस सिविल डिफेंस सेंटर पर हुआ था जहां उन्होंने अपने परिवार को सुरक्षित रखने के लिए पनाह दी थी। इसके लगभग दो दशक बाद, 28 अप्रैल 2026 को उनके जीवन में एक और बड़ा हादसा हुआ जब उनके तीन साथी Hussein Ghadbouni, Hussein Sati और Hadi Daher Majdal Zoun गांव में हुए एक इजरायली डबल-टैप हमले में मारे गए। इन भारी व्यक्तिगत नुकसान के बावजूद उन्होंने अपना काम बंद नहीं किया और आज भी लगातार बचाव कार्यों में जुटे हुए हैं।

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बेटा भी आया पिता की मदद के लिए

मुश्किल वक्त में भी Ali Safiuddin ने हिम्मत नहीं हारी और आज मलबे में फंसे नागरिकों को बाहर निकालने के उनके इस अभियान में उनका 18 साल का बेटा Husein भी उनका साथ दे रहा है। उनके बेटे ने भी सिविल डिफेंस ज्वाइन कर लिया है और अपने पिता के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम कर रहा है। सफिद्दीन का कहना है कि वह चाहते हैं कि यह फिल्म दुनिया के सामने इजरायली हमलों की सच्चाई को लेकर आए और यह दिखाए कि इस युद्ध का बच्चों और बुजुर्गों पर कितना बुरा असर पड़ रहा है। यह डॉक्यूमेंट्री ऐसे समय में सामने आई है जब लेबनान और इजरायल के बीच बने 10 किलोमीटर के सैन्य सुरक्षा क्षेत्र जिसे 'Yellow Line' कहा जाता है, वहां तनाव लगातार बना हुआ है।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता और संयुक्त राष्ट्र के आंकड़े

संयुक्त राष्ट्र के आंकड़ों के मुताबिक, मार्च 2026 की शुरुआत से लेकर अब तक लेबनान में कम से कम 135 फर्स्ट रिस्पॉन्डर और हेल्थकेयर वर्कर्स मारे जा चुके हैं। हैरानी की बात यह है कि इन लोगों को अक्सर तब निशाना बनाया जाता है जब वे किसी पुरानी जगह पर हुए हमले के बाद मदद पहुंचाने पहुंचते हैं। इन घटनाओं के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इसकी काफी आलोचना हो रही है और लेबनान के प्रधानमंत्री ने देश के दक्षिणी हिस्से में हो रहे इन हमलों को अंतरराष्ट्रीय कानून का खुला उल्लंघन बताया है। आम लोग भी इन खबरों को पढ़कर युद्ध के भयानक परिणामों को साफ महसूस कर रहे हैं कि कैसे राहत और बचाव कार्य करने वालों के लिए भी काम करना मुश्किल हो गया है।

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