अल्जीरियाई महिला फुटबॉल टीम ने जीता कांस्य पदक, मैच के बाद मैदान पर लहराया फिलिस्तीनी झंडा

अल्जीरिया की महिला राष्ट्रीय फुटबॉल टीम ने Women's Africa Cup of Nations (WAFCON) में शानदार प्रदर्शन करते हुए कांस्य पदक अपने नाम किया। मोरक्को के खिलाफ हुए कड़े मुकाबले और पेनल्टी शूटआउट में जीत हासिल करने के बाद अल्जीरियाई टीम ने जश्न मनाने का एक अलग ही तरीका चुना। पूरी टीम अपनी गोलकीपर Chloé Yamina N’Gazi के पीछे एकजुट होकर मैदान पर उतरी और उन्होंने फिलिस्तीन का झंडा लहराया। इस दौरान खिलाड़ियों ने फिलिस्तीन के साथ अपनी एकजुटता खुलकर दिखाई, जिसकी चर्चा अब हर तरफ हो रही है।
खिलाड़ी ने बताई झंडा दिखाने की वजह
मैच के बाद इस पूरे मामले पर बात करते हुए गोलकीपर Chloé Yamina N’Gazi ने मीडिया को बताया कि दुनिया के किसी भी कोने में खुशी के पल मनाते वक्त उन लोगों को कभी नहीं भूलना चाहिए जो दुनिया में कहीं और संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने साफ किया कि फिलिस्तीन के हालात पर लोगों का ध्यान खींचना इस समय बहुत जरूरी है। उनका यह बयान और मैदान पर झंडा दिखाना खेल जगत में एक बड़ा विषय बन गया है, क्योंकि खेल के मैदान पर इस तरह के राजनीतिक या संवेदनशील मुद्दों से जुड़े संकेत देने पर पहले से ही कड़ी पाबंदी लगी हुई है।
कड़े नियमों के घेरे में खेल संगठन
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि Confederation of African Football (CAF) और FIFA के नियमों के अनुसार किसी भी मैच या आधिकारिक समारोह के दौरान राजनीतिक, धार्मिक या निजी प्रतीकों को दिखाने की सख्त मनाही है। कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन फॉर स्पोर्ट के साल 2025 के एक फैसले के बाद सीएएफ ने अपने नियमों को और अधिक सख्त कर दिया है। इसके तहत सभी राष्ट्रीय फेडरेशन के लिए राजनीतिक तटस्थता बनाए रखना अनिवार्य कर दिया गया है। साथ ही यह भी चेतावनी दी गई है कि अगर कोई देश इन नियमों का पालन नहीं करता है, तो उस पर कड़े अनुशासनात्मक एक्शन लिए जा सकते हैं।
अल्जीरियाई फुटबॉल फेडरेशन का पुराना इतिहास रहा है कि उन्होंने हमेशा फिलिस्तीन का समर्थन किया है। यहाँ तक कि उन्होंने फिलिस्तीनी राष्ट्रीय टीम के मैचों की मेजबानी भी अपने देश में की है। हालांकि ताजा घटना के सामने आने के बाद अब क्षेत्रीय खेल निकाय इस बात की दोबारा जाँच कर सकते हैं कि क्या नियमों का सही से पालन हो रहा है या नहीं। इस पूरे मामले पर आगे चलकर अल्जीरियाई संघ को खेल अधिकारियों की तरफ से कुछ तीखे सवालों का सामना भी करना पड़ सकता है।