Uttarakhand News: अल्मोड़ा के युवा ने बनाई इलेक्ट्रीक उड़ने वाली कार, आसमान में हुआ सफल टेस्ट.

Praggya Singh sabal9 August 20263 min read82 viewsIndia
Uttarakhand News: अल्मोड़ा के युवा ने बनाई इलेक्ट्रीक उड़ने वाली कार, आसमान में हुआ सफल टेस्ट.

उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले से एक बहुत बड़ी और हैरान करने वाली खबर सामने आई है, जहां एक स्थानीय युवा ने अपनी मेहनत और लगन से भारत में पर्सनल हवाई सफर की दिशा में एक नया इतिहास रच दिया है। Ravi Tamta नाम के एक इन्नोवेटर ने पूरी तरह से बिजली से चलने वाली यानी इलेक्ट्रिक उड़ने वाली कार का सिंगल-सेटर प्रोटोटाइप तैयार किया है, जिसका नाम HAPIDA SKYNeX रखा गया है। इस अनोखे वाहन को उन्होंने अपनी खुद की स्टार्टअप कंपनी Hapida Sky Private Limited के तहत विकसित किया है, जिसने तकनीकी दुनिया में सबका ध्यान अपनी तरफ खींच लिया है।

सफल परीक्षण और प्रशासनिक निगरानी

इस उड़ने वाली कार के सफल परीक्षण इसी साल 6 अगस्त और 7 अगस्त 2026 को किए गए, जिससे देश के एविएशन सेक्टर में खुशी की लहर दौड़ गई। इसमें से एक मुख्य टेस्ट 7 अगस्त 2026 को स्थानीय प्रशासन की कड़ी निगरानी में हेमवती नंदन बहुगुणा स्टेडियम में संपन्न हुआ, जिसकी रिपोर्ट 8 और 9 अगस्त 2026 को मीडिया में आई। इस ऐतिहासिक सफलता के बाद उत्तराखंड के मुख्यमंत्री Pushkar Singh Dhami और केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री Ram Mohan Naidu Kinjarapu ने सार्वजनिक रूप से रवि टम्टा को बधाई दी और उनके इस बड़े कदम की जमकर सराहना की।

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गाड़ी की खासियत और पहाड़ी इलाकों में फायदा

यह वाहन पूरी तरह से इलेक्ट्रीक है, जिसका मतलब है कि यह किसी भी तरह के ईंधन यानी पेट्रोल-डीजल के बिना चलता है और इससे कोई जहरीला धुआं भी नहीं निकलता है, जो इसे पर्यावरण के लिए पूरी तरह से सुरक्षित बनाता है। ड्रोन टेक्नोलॉजी से प्रेरित होकर बनाई गई यह कार पहाड़ी इलाकों के सफर को पूरी तरह से बदलने की क्षमता रखती है। पहाड़ी रास्तों पर जो सफर तय करने में 40 किलोमीटर की दूरी के लिए 90 मिनट यानी डेढ़ घंटा लग जाता है, वही सफर इस उड़ने वाली कार के जरिए आसमान के रास्ते मात्र 10 से 15 मिनट में पूरा किया जा सकेगा।

देशी और विदेशी तकनीक का मेल

इस उड़ने वाली कार को बनाने में रवि टम्टा ने अपनी सूझबूझ का पूरा इस्तेमाल किया है। हालांकि इस गाड़ी के कुछ जरूरी उपकरण चीन से मंगाए गए थे और इसका इंजन तमिलनाडु से लिया गया था, लेकिन इसके बावजूद गाड़ी की पूरी डिजाइन, उसकी असेंबली और डेवलपमेंट का सारा काम खुद रवि टम्टा ने ही अपने दिमाग से सोचकर पूरा किया है। यह इस बात का सबूत है कि देश के आम युवा भी अब अपनी काबिलियत के दम पर बड़े-बड़े टेक्नोलॉजी वाले आविष्कार करने में पूरी तरह सक्षम हैं।

आगे की कानूनी प्रक्रिया और मंजूरी

एक शुरुआती प्रोटोटाइप होने की वजह से HAPIDA SKYNeX को अभी कमर्शियल यानी आम लोगों के इस्तेमाल के लिए बाजार में लाने से पहले कई कड़े टेस्ट से गुजरना होगा। इसके लिए नागरिक उड्डयन महानिदेशालय यानी DGCA से सुरक्षा और संचालन से जुड़े सभी जरूरी लाइसेंस और अप्रूवल लेने होंगे। रवि टम्टा का यह इरादा है कि वे अपनी इस खोज का पेटेंट करवाएंगे और इसके बाद डीजीसीए के अधिकारियों से मिलकर इसके नियम और सुरक्षा मानक तय करेंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तराखंड के ऊंचे-नीचे पहाड़ी रास्ते इस तरह के उड़ने वाले वाहनों के परीक्षण के लिए सबसे बेहतरीन जगह हैं, जिससे आने वाले समय में दूर-दराज के गांवों तक पहुंच आसान होगी, आपदा राहत कार्यों में मदद मिलेगी और पर्यटन को भी नया बढ़ावा मिलेगा।

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