America News: अमेरिका साल 2030 तक नहीं कर पाएगा यूक्रेन को भेजी गई जैवलिन मिसाइलों की भरपाई, पेंटागन की रिपोर्ट में हुआ खुलासा.

अमेरिका को अपनी सैन्य ताकत और हथियारों के स्टॉक को लेकर आने वाले सालों में बड़ी मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। ताजा जानकारी के मुताबिक, अमेरिका कम से कम साल 2030 तक यूक्रेन को युद्ध के दौरान भेजी गई जैवलिन एंटी-टैंक मिसाइलों की भरपाई बिल्कुल नहीं कर पाएगा। यह बड़ा दावा अमेरिकी रक्षा विभाग यानी पेंटागन के बजट दस्तावेजों के आधार पर रूसी मीडिया एजेंसी रिया नोवोस्ती ने किया है, जिससे पूरी दुनिया में हथियारों के उत्पादन और सप्लाई को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
वित्तीय वर्ष 2022 से 2025 के बीच की गई थी खरीद
यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद से हथियारों की भारी कमी हुई है। वित्तीय वर्ष 2022 से 2025 के दौरान, अमेरिकी सेना ने अपने खाली हो रहे स्टॉक को दोबारा भरने के लिए कुल 9,374 मिसाइलें खरीदने का बड़ा फैसला किया था। हालांकि, हालात यह हैं कि इन हथियारों के बड़े-बड़े अनुबंधों पर हस्ताक्षर होने के कई-कई साल बाद भी ये मिसाइलें सेना के हाथों में नहीं पहुंच पा रही हैं। कंपनियों से मिल रही डिलीवरी में लगातार देरी हो रही है, जिससे अमेरिकी सेना की चिंताएं काफी ज्यादा बढ़ गई हैं।
अगस्त 2030 तक शुरू नहीं होगी सबसे हालिया डिलीवरी
हथियारों की सप्लाई में हो रही देरी का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि सबसे हालिया डिलीवरी के तहत 944 मिसाइलों का एक नया बैच खरीदा जाना है। इस बैच के लिए साल 2024 में ही फंड जारी कर दिया गया था, लेकिन इसके बावजूद इस खेप की डिलीवरी अगस्त 2030 से पहले शुरू नहीं हो पाएगी। रिया नोवोस्ती की तरफ से की गई खास गणना के अनुसार, केवल मिसाइलें ही नहीं बल्कि जैवलिन सिस्टम को चलाने के लिए जरूरी कमांड और लॉन्च यूनिट की डिलीवरी में भी कई लंबे सालों की देरी होने की पूरी संभावना है।
उत्पादन क्षमता से अधिक की गई थी हथियारों की खरीद
यूक्रेन को लगातार हथियार भेजने के बाद अमेरिकी सेना की ताकत कम हुई है। यूक्रेन को भेजे गए हथियारों की भरपाई के लिए खरीदे गए सबसे नए बैच में केवल 50 वॉरहेड शामिल किए गए हैं और इसे साल 2028 के अंत तक अमेरिकी सेना को सौंपे जाने की योजना बनाई गई है। पेंटागन खुद इस बात को मानता है कि वित्तीय वर्ष 2022 से 2024 के दौरान जितनी बड़ी मात्रा में अतिरिक्त हथियारों की खरीद के आदेश दिए गए थे, वह असल में कारखानों और मिलिट्री सुविधाओं की कुल उत्पादन क्षमता से कहीं ज्यादा थी।
एक मिसाइल के उत्पादन चक्र में लगता है लंबा समय
रिया नोवोस्ती की रिपोर्ट के मुताबिक, किसी भी एक जैवलिन मिसाइल के लिए पूरी खरीद प्रक्रिया और उसके निर्माण यानी उत्पादन चक्र में कुल 4.5 साल यानी साढ़े चार साल तक का लंबा समय लग जाता है। इसके अलावा, सेना के लिए बेहद जरूरी कमांड और लॉन्च यूनिट को तैयार करने में भी चार साल से थोड़ा अधिक समय लगता है। यही वजह है कि अमेरिका चाहकर भी इतनी जल्दी अपने हथियारों के भंडार को दोबारा पहले जैसी स्थिति में नहीं ला पा रहा है और उसे साल 2030 तक का लंबा इंतजार करना पड़ रहा है।