अमेरिका, दक्षिण कोरिया और जापान की बड़ी तैयारी, इस साल फिर होगा फ्रीडम एज सैन्य अभ्यास

अमेरिका, दक्षिण कोरिया और जापान ने इस साल होने वाले त्रिपक्षीय 'फ्रीडम एज' संयुक्त सैन्य अभ्यास की तैयारियां शुरू कर दी हैं। अमेरिकी पैसिफिक कमांड यानी PACOM ने बुधवार को इस बात की आधिकारिक पुष्टि की है कि तीनों देश मिलकर इस बड़े रक्षा अभ्यास को अंजाम देने जा रहे हैं। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब अंतरराष्ट्रीय राजनीति और कूटनीति में कई तरह के बदलाव देखने को मिल रहे हैं और रक्षा रणनीतियों पर नए सिरे से विचार किया जा रहा है।
फ्रीडम एज 2026 की तैयारियां शुरू
दक्षिण कोरिया की सरकारी समाचार एजेंसी योनहाप को जानकारी देते हुए पैसिफिक कमांड की प्रवक्ता लेफ्टिनेंट कमांडर क्लो मॉर्गन ने बताया कि अमेरिकी पैसिफिक कमांड, जापान सेल्फ-डिफेंस फोर्सेज और दक्षिण कोरियाई सशस्त्र बलों के साथ मिलकर इस आगामी सैन्य अभ्यास की रूपरेखा तैयार कर रहा है। यह एक प्रमुख मल्टी-डोमेन अभ्यास होगा जिसका मुख्य उद्देश्य तीनों देशों के बीच साझा मूल्यों को और अधिक मजबूत करना है। इसके साथ ही इसका मकसद सैन्य तालमेल को बेहतर करना और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति तथा स्थिरता बनाए रखने के लिए रक्षा सहयोग को बढ़ावा देना है।
अभ्यास के स्वरूप पर अभी संशय
हालांकि अमेरिकी कमांड ने अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि इस साल होने वाला यह अभ्यास पिछले संस्करणों की तरह ही बड़े पैमाने पर आयोजित किया जाएगा या फिर इसके आकार, दायरे और अवधि में कुछ बदलाव किए जाएंगे। यह स्थिति इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निर्देश के बाद से अमेरिका और दक्षिण कोरिया ने अपने कुछ संयुक्त सैन्य अभ्यासों के दायरे को सीमित कर दिया है। ट्रंप प्रशासन ने पहले ऐसे अभ्यासों को उत्तर कोरिया के लिए संभावित रूप से अनुचित और शत्रुतापूर्ण संदेश देने वाला माना था।
कैंप डेविड शिखर सम्मेलन से जुड़ा है इतिहास
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि 'फ्रीडम एज' अभ्यास की शुरुआत अगस्त 2023 में हुई थी। यह अमेरिका, दक्षिण कोरिया और जापान के शीर्ष नेताओं के बीच हुए कैंप डेविड शिखर सम्मेलन के सबसे महत्वपूर्ण परिणामों में से एक था। इस अभ्यास का मुख्य उद्देश्य तीनों देशों के बीच त्रिपक्षीय सुरक्षा सहयोग को संस्थागत रूप देना और क्षेत्र में किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए मिलकर काम करना था। इसके पिछले संस्करण दक्षिण कोरिया के दक्षिणी द्वीप जेजू के आसपास अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में सफलतापर्वक आयोजित किए गए थे।
उत्तर कोरिया का कड़ा विरोध
उत्तर कोरिया हमेशा से अमेरिका और दक्षिण कोरिया के बीच होने वाले इन सैन्य अभ्यासों का कड़ा विरोध करता रहा है। प्योंगयांग प्रशासन इन तमाम गतिविधियों को सीधे तौर पर अपने खिलाफ हमले की तैयारी के रूप में देखता है और सहयोगी देशों के इस दावे को पूरी तरह खारिज करता है कि ये अभ्यास केवल रक्षात्मक प्रकृति के हैं। उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग-उन की बहन किम यो-जोंग ने पहले भी इन सैन्य अभ्यासों को गैर-जिम्मेदाराना ताकत का प्रदर्शन बताया था और इसके गंभीर परिणामों की चेतावनी दी थी। इसके अलावा वर्कर्स पार्टी ऑफ कोरिया के केंद्रीय सैन्य आयोग के उपाध्यक्ष पाक जोंग-चोन ने भी पिछले साल सितंबर में इसे आक्रामकता की तैयारी से जुड़ा युद्धाभ्यास करार दिया था।