अरब और इस्लामिक देशों का बड़ा फैसला: गाजा पर हमलों और फिलिस्तीन के जबरन विस्थापन का किया कड़ा विरोध

Sushma Kumari6 August 20262 min read82 viewsWorld
अरब और इस्लामिक देशों का बड़ा फैसला: गाजा पर हमलों और फिलिस्तीन के जबरन विस्थापन का किया कड़ा विरोध

6 अगस्त 2026 को सऊदी अरब, मिस्र, कतर, जॉर्डन, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), इंडोनेशिया, पाकिस्तान और तुर्की सहित कई प्रमुख अरब और इस्लामिक देशों के विदेश मंत्रियों ने एक संयुक्त बयान जारी किया है। इस बयान में सभी देशों ने फिलिस्तीनी क्षेत्रों पर कब्जा करने, इजरायली संप्रभुता थोपने और फिलिस्तीनी नागरिकों को उनके घरों से जबरन बाहर निकालने की किसी भी कोशिश का पुरजोर विरोध किया है।

गाजा में मानवीय स्थिति पर गहरी चिंता

विदेश मंत्रियों ने गाजा पट्टी में जारी इजरायली सैन्य कार्रवाई की कड़ी निंदा की है। उन्होंने विशेष रूप से स्वास्थ्य सुविधाओं, बुनियादी ढांचे और नागरिकों को निशाना बनाने की घटनाओं को अंतरराष्ट्रीय कानून और मानवीय कानूनों का गंभीर उल्लंघन बताया है। मिस्र के राज्य सूचना सेवा के अनुसार, इन हमलों के कारण बड़ी संख्या में आम लोग हताहत हो रहे हैं, जो क्षेत्र में शांति के प्रयासों को खतरे में डाल रहे हैं।

GulfHindi की हर खबर सबसे पहलेJoin

शांति बहाली के लिए दो-राज्य समाधान का आह्वान

इन देशों का मानना है कि इस समस्या का समाधान केवल एक गंभीर राजनीतिक प्रक्रिया से ही निकल सकता है। सभी मंत्रियों ने इस बात पर जोर दिया कि 1967 की सीमाओं के आधार पर एक स्वतंत्र फिलिस्तीनी राज्य का गठन किया जाए, जिसकी राजधानी पूर्वी यरुशलम हो। यही वह रास्ता है जिससे एक स्थाई और व्यापक शांति कायम की जा सकती है।

क्षेत्रीय स्थिरता पर मंडराता खतरा

संयुक्त अरब अमीरात के विदेश मंत्रालय की ओर से साझा की गई जानकारी के अनुसार, मंत्रियों ने चेतावनी दी है कि ये उल्लंघन गाजा के लिए बनाई गई संघर्ष समाधान योजना के दूसरे चरण को पटरी से उतार सकते हैं। इतना ही नहीं, यह पश्चिम बैंक में बस्तियों के विस्तार और यरुशलम में किए जा रहे एकतरफा बदलावों के साथ मिलकर स्थिति को और अधिक बिगाड़ रहा है। ये सभी कदम एक सोची-समझी नीति का हिस्सा लगते हैं, जिसका मकसद ताकत के बल पर अपनी बात मनवाना है।

अंत में, इन देशों ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय और विशेष रूप से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से अपील की है कि वे अपनी जिम्मेदारी निभाएं। इन देशों ने मांग की है कि इजरायल को अंतरराष्ट्रीय नियमों का पालन करने के लिए मजबूर किया जाए और उन लोगों को जवाबदेह ठहराया जाए जो इन गंभीर उल्लंघनों के लिए जिम्मेदार हैं।

Share:

Comments

Leave a comment