Jerusalem को लेकर 14 देशों के विदेश मंत्रियों ने दी चेतावनी, कहा- यह 2 अरब मुसलमानों की भावनाओं से खिलवाड़ है.

अम्मान में हाल ही में 14 अरब और इस्लामी देशों के विदेश मंत्रियों की एक महत्वपूर्ण बैठक हुई है। इस बैठक में इज़राइल द्वारा कब्जे वाले Jerusalem में पवित्र धार्मिक स्थलों पर किए जा रहे हमलों को लेकर गंभीर चेतावनी जारी की गई है। मंत्रियों ने स्पष्ट किया है कि इस तरह की हरकतें पूरी दुनिया के करीब 2 अरब मुसलमानों की भावनाओं को भड़काने वाली हैं। उन्होंने चिंता जताई है कि ये कार्रवाइयां न केवल क्षेत्रीय बल्कि अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के लिए भी बड़ा खतरा पैदा कर रही हैं।
शांति और सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा
बैठक में Arab Ministerial Committee के सदस्य शामिल हुए, जिनका काम इज़राइल की अवैध नीतियों के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आवाज उठाना है। इसके साथ ही Pakistan, Indonesia, Turkiye और Malaysia के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे। इस कमेटी में Saudi Arabia, Tunisia, Algeria, Iraq, Qatar, Somalia, Palestine, Egypt, Morocco और Jordan के शीर्ष राजनयिक शामिल थे। इन सभी नेताओं ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय और UN Security Council से तुरंत दखल देने की मांग की है ताकि इज़राइल के इन कदमों को रोका जा सके।
इन अवैध कदमों में बस्तियों का विस्तार, जमीन पर कब्जा, फिलिस्तीनी अर्थव्यवस्था को दबाना और वहां के राष्ट्रीय संस्थानों को निशाना बनाना शामिल है। मंत्रियों ने इन सभी चीजों को कब्जे को मजबूत करने की एक व्यवस्थित नीति का हिस्सा बताया है। इसके अलावा, सेटलर आतंकवाद की बढ़ती घटनाओं पर भी गहरा दुख व्यक्त किया गया है।
दो-राज्य समाधान पर जोर
मंत्रियों ने Gaza में युद्धविराम समझौते के उल्लंघन और वहां पैदा हुए मानवीय संकट की कड़ी निंदा की है। उन्होंने कहा कि ये स्थितियां शांति की उम्मीदों को खत्म कर रही हैं। मंत्रियों ने फिर से दोहराया कि East Jerusalem पूरी तरह से फिलिस्तीनी क्षेत्र का हिस्सा है और इस पर इज़राइल का कोई अधिकार नहीं है। इसे State of Palestine की राजधानी माना जाना चाहिए।
इज़राइल द्वारा शहर की अरबी, इस्लामी और ईसाई पहचान को बदलने की किसी भी कोशिश को उन्होंने सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि ऐसी हरकतें अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन हैं। मंत्रियों ने जोर दिया कि 1967 की सीमाओं के आधार पर एक स्वतंत्र और संप्रभु फिलिस्तीनी राज्य का निर्माण ही एकमात्र रास्ता है जिससे इस क्षेत्र में स्थायी शांति कायम हो सकती है। वे सभी लोग जो इस क्षेत्र की शांति को लेकर चिंतित हैं, वे इस बैठक के परिणामों को काफी महत्वपूर्ण मान रहे हैं क्योंकि इसमें दुनिया भर के कई बड़े देशों ने अपनी एकजुटता दिखाई है।