सीरिया पर इज़राइल के हवाई हमलों से भड़के अरब देश, सऊदी अरब और तुर्की ने की कड़ी निंदा.

अरब और इस्लामिक देशों ने सीरिया के अट्टे-पट्टे वाले इलाकों पर हुए हमलों को लेकर अपनी कड़ी नाराज़गी जाहिर की है। 18 अगस्त 2026 को इज़राइल ने सीरिया के उत्तर-पश्चिम इदलिब प्रांत में स्थित अबू अल-धुहूर एयर बेस पर कुल आठ हवाई हमले किए। इन हमलों की वजह से रनवे और स्टोरेज सुविधाओं को काफी नुकसान पहुंचा है, हालांकि राहत की बात यह रही कि इस घटना में किसी भी व्यक्ति के हताहत होने की कोई खबर सामने नहीं आई है।
तुर्की के सैन्य प्रतिनिधिमंडल के दौरे के तुरंत बाद हुआ हमला
यह पूरी घटना उस समय सामने आई जब एक तुर्की सैन्य प्रतिनिधिमंडल ने सीरियाई सेना के लिए चल रहे मरम्मत और पुनर्वास कार्यों का जायजा लेने के लिए 17 अगस्त को इस साइट का दौरा किया था। हालांकि इज़राइल की सेना ने इस मामले पर आधिकारिक तौर पर चुप्पी साध रखी है, लेकिन एक वरिष्ठ अधिकारी ने यह जानकारी दी है कि संवेदनशील खुफिया जानकारी के आधार पर इस ऑपरेशन से पहले वॉशिंगटन को पहले ही सूचित कर दिया गया था। इस एयर बेस पर दिसंबर 2024 में पूर्व सरकार के पतन के बाद से यह पहला हमला बताया जा रहा है।
अंतर्राष्ट्रीय समुदाय और खाड़ी देशों की कड़ी प्रतिक्रिया
सऊदी अरब, तुर्की, मिस्र, जॉर्डन, कतर और कुवैत सहित कई देशों ने इस हमले की कड़े शब्दों में निंदा की है। इन देशों ने साफ तौर पर कहा कि यह कार्रवाई सीरिया की संप्रभुता और अंतरराष्ट्रीय कानून का खुला उल्लंघन है। जीसीसी (GCC) के महासचिव जassim मोहम्मद अल-बुडैवी ने आधिकारिक बयान जारी करते हुए बताया कि ये हमले राज्य की संप्रभुता के उल्लंघन को रोकने वाले अंतरराष्ट्रीय नियमों के पूरी तरह खिलाफ हैं। इस संबंध में विस्तृत जानकारी आप QNA News पर देख सकते हैं।
सीरियाई विदेश मंत्री की संयुक्त राष्ट्र से अपील
सीरिया के विदेश मंत्री असाद अल-शिबानी ने इस आक्रामकता को एक अनुचित उकसावा और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए सीधा खतरा करार दिया है। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से यह मांग की है कि वह इस तरह की बार-बार होने वाली घुसपैठ के खिलाफ एक बहुत ही निर्णायक रुख अपनाए। इस बारे में अधिक जानकारी QNA News पोर्टल पर उपलब्ध है।
इसके अलावा तुर्की के विदेश मंत्रालय ने भी अंतरराष्ट्रीय कानून की अनदेखी करने वाली इन कार्रवाइयों के लिए जवाबदेही तय करने की बात कही है। अमेरिका के राजदूत और सीरिया के लिए विशेष दूत टॉम बराक ने भी इस पर गहरी चिंता जताई। उन्होंने इस हमले को एक अनावश्यक तनाव बढ़ाने वाला कदम बताया और कहा कि अंतरिम राष्ट्रपति अहमद अल-शरा की सरकार ने लगातार इज़राइल के साथ तनाव को कम करने की ही कोशिश की है।