अरब लीग के महासचिव नबील फहमी ने ब्रिटेन से गाजा और वेस्ट बैंक में तुरंत दखل देने की अपील की.

अरब लीग के महासचिव नबील फहमी ने 18 अगस्त 2026 को यूनाइटेड किंगडम यानी ब्रिटेन से एक बड़ा और कड़ा कदम उठाने की औपचारिक मांग की है। कुवैत समाचार एजेंसी KUNA के माध्यम से सामने आई इस जानकारी के मुताबिक, फहमी ने ब्रिटिश सरकार से कहा है कि वह इजरायली कब्जे के खिलाफ अपनी राजनीतिक स्थिति को और अधिक मजबूत करे। उन्होंने ब्रिटेन से आग्रह किया कि वह गाजा और वेस्ट बैंक में चल रहे सैन्य हमलों को रोकने के लिए तुरंत हस्तक्षेप करे, ताकि आम लोगों तक लगातार राहत सामग्री पहुंच सके और दो-देशीय समाधान यानी टू-स्टेट सॉल्यूशन को असल जमीन पर लागू किया जा सके।
शांति प्रयासों में रुकावट का कारण
फहमी की यह टिप्पणियां ऐसे समय में सामने आई हैं जब इस पूरे संघर्ष को सुलझाने के लिए कूटनीतिक प्रयास तेज हो चुके हैं। इससे पहले 17 अगस्त 2026 को उन्होंने आठ अरब और इस्लामिक देशों के एक संयुक्त बयान का स्वागत किया था। इस संयुक्त बयान में अमेरिका के राष्ट्रपति डонаल्ड ट्रंप की ओर से पेश किए गए शांति प्रस्ताव को इजरायल द्वारा खारिज किए जाने की कड़ी निंदा की गई थी। फहमी का कहना था कि शांति वार्ताओं में जो गतिरोध पैदा हुआ है, उसकी मुख्य वजह इजरायल का अपने वादों से पीछे हटना है, जबकि हमास ने पहले ही प्रस्तावित व्यवस्थाओं को स्वीकार कर लिया था।
नेतन्याहू पर साधा निशाना और अमेरिका से अपील
इस बीच, शांति प्रयासों में रुकावट के लिए उन्होंने सीधे तौर पर इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को जिम्मेदार ठहराया। फहमी ने आरोप लगाया कि नेतन्याहू अंतरराष्ट्रीय सहमति और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव UN Security Council Resolution 2803 की परवाह करने के बजाय अपने घरेलू राजनीतिक फायदों को ज्यादा प्राथमिकता दे रहे हैं। उन्होंने अमेरिका से भी यह अपील की है कि वह अपने प्रभाव का पूरा इस्तेमाल करे ताकि प्रस्तावित शांति योजना के दूसरे चरण में तेजी से आगे बढ़ा जा सके। फहमी ने हाल ही में हो रहे सैन्य अभियानों और बस्तियों के लगातार विस्तार की आलोचना करते हुए कहा कि इन सब हरकतों की वजह से मानवीय सहायता पहुंचाने के काम में भारी बाधा आ रही है। ब्रिटेन से यह अपील ऐसे समय में की गई है जब इससे पहले 19 जून 2026 को संयुक्त राष्ट्र में ब्रिटेन के उप स्थायी प्रतिनिधि जेम्स किउरीकी ने भी इजरायल से गाजा में राहत सामग्री पर लगी पाबंदियों को हटाने की मांग की थी और दो-देशीय ढांचे के प्रति ब्रिटेन के समर्थन को दोहराया था।