Bangladesh News: बांग्लादेश में चुपचाप बढ़ाई गई बिजली की कीमतें, आम जनता की जेब पर पड़ा सीधा असर.

बांग्लादेश में गर्मी के मौसम के बीच आम लोगों की परेशानी और बढ़ गई है क्योंकि वहां की सरकार ने गुपचुप तरीके से बिजली के दाम बढ़ा दिए हैं। इस फैसले से आम आदमी का बजट गड़बड़ा गया है और हर महीने आने वाला बिजली का बिल अब ज्यादा आएगा। बांग्लादेश एनर्जी रेगुलेटरी कमीशन यानी बीईआरसी ने यह बड़ा कदम उठाया है जिसके तहत बिजली की दरों में भारी इजाफा किया गया है। अधिकारियों के मुताबिक यह बढ़ोतरी ऐसे समय पर की गई है जब देश भीषण गर्मी की चपेट में है और बिजली की मांग बहुत ज्यादा बढ़ चुकी है।
थोक और खुदरा दरों में कितनी हुई बढ़ोतरी
मिली जानकारी के अनुसार बीईआरसी ने जून महीने में ही चुपचाप बिजली की थोक दरों में इजाफा कर दिया था। थोक बिजली की दर को 7 टका से बढ़ाकर सीधे 8.39 टका प्रति किलोवाट घंटा कर दिया गया है। यह कुल मिलाकर 19.85 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी है। इस बदलाव का असर सीधा खुदरा यानी रिटेल टैरिफ पर भी पड़ा है जिससे औसत खुदरा दर 16.68 प्रतिशत बढ़कर 9.11 टका से 10.63 टका प्रति यूनिट हो गई है। हालांकि राहत की बात यह है कि कम बिजली खर्च करने वाले गरीब परिवारों को इस बढ़ोतरी से दूर रखा गया है और उनके लिए पुरानी छूट को वैसे ही जारी रखा गया है।
आम परिवारों पर कैसे पड़ेगा असर
ढाका ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक नई दरों के लागू होने के बाद महीने में 76 से 200 यूनिट तक बिजली इस्तेमाल करने वाले घरेलू ग्राहकों को शुरुआती 75 यूनिट से ज्यादा की खपत के लिए अब 8.50 टका प्रति यूनिट के हिसाब से भुगतान करना होगा। पहले यह दर 7.20 टका प्रति यूनिट हुआ करती थी। उदाहरण के तौर पर जो परिवार महीने में कुल 200 यूनिट बिजली खर्च करते हैं, उनका पुराना बिल 1,294.50 टका आता था जो अब बढ़कर 1,457 टका हो गया है। इसका मतलब यह हुआ कि डिमांड चार्ज और वैट लगने से पहले ही ग्राहकों को हर महीने 162.50 टका अतिरिक्त चुकाना पड़ रहा है।
गर्मी और तापमान का बढ़ता प्रकोप
बिजली की कीमतें ऐसे वक्त में बढ़ाई गई हैं जब पूरे बांग्लादेश में गर्मी का प्रकोप अपने चरम पर है और लोगों का जीना मुहाल हो गया है। आंकड़े बताते हैं कि साल 1980 से 2023 के बीच बांग्लादेश का अधिकतम तापमान 1.1 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ चुका है। वहीं राजधानी ढाका की बात करें तो यहाँ तापमान में 1.4 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसके अलावा साल 1989 से 2020 के बीच ढाका शहर के घने और हरे-भरे इलाकों में 47 प्रतिशत की भारी गिरावट आई है जिसने गर्मी को और ज्यादा बढ़ा दिया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी डब्ल्यूएचओ ने इस गंभीर स्थिति से निपटने के लिए आवास नीतियों में जरूरी बदलाव करने की सलाह दी है ताकि लोगों को इस बढ़ती गर्मी से कुछ राहत मिल सके।