Bangladesh Energy Crisis: बांग्लादेश में गहराया ऊर्जा संकट, बिजली कटौती और महंगाई से आम जनता परेशान.

बांग्लादेश में प्रधानमंत्री Tarique Rahman के कार्यकाल के छह महीने पूरे होने के बाद देश गंभीर ऊर्जा संकट और बढ़ती महंगाई का सामना कर रहा है। पिछले शासन को हटाने में अहम भूमिका निभाने वाली जनता अब सरकार से आर्थिक राहत की उम्मीद कर रही थी, लेकिन बिगड़ते हालात ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। देश में बिजली की भारी किल्लत और जरूरी चीजों के दाम बढ़ने से आम आदमी का जीवन मुश्किल हो गया है।
बिजلي और गैस की भारी कमी
देश में ऊर्जा की आपूर्ति बेहद निचले स्तर पर पहुंच चुकी है। 19 अगस्त 2026 को महेशखली में एक्सेलेरेट एनर्जी द्वारा संचालित तैरता हुआ एलएनजी टर्मिनल ईंधन की कमी के कारण पूरी तरह से बंद हो गया। इससे पहले पावर, एनर्जी एंड मिनरल रिसورس मंत्री Iqbal Hassan Mahmood ने 6 अगस्त को उद्योग से जुड़े लोगों को स्थिति जल्द सुधरने का भरोसा दिया था, लेकिन इसके बाद भी गैस और बिजली की आपूर्ति लगातार कम होती चली गई।
नतीजतन, पूरे देश में बड़े पैमाने पर लोड-शेडिंग हो रही है। 19 अगस्त को शाम 7:00 बजे बिजली की मांग और आपूर्ति में 2,530 मेगावाट का अंतर दर्ज किया गया, जबकि रात 9:00 बजे 2,443 मेगावाट की लोड-शेडिंग रिकॉर्ड की गई। राजधानी ढाका में भी लगातार बिजली कटौती की खबरें सामने आ रही हैं, जिससे आम जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है।
उद्योग जगत पर संकट के बादल
बिजली और गैस की इस किल्लत का सबसे बुरा असर औद्योगिक क्षेत्र पर पड़ रहा है। ऊर्जा संकट के चलते देश की 900 से अधिक टेक्सटाइल मिलों को मजबूरन बंद करना पड़ा है। इस वजह से रेडीमेड गारमेंट, स्टील, पेपर, पार्टिकल बोर्ड और सिरेमिक उद्योगों का कामकाज पूरी तरह ठप हो गया है। वित्त और योजना मंत्री Amir Khosru Mahmud Chowdhury ने 16 अगस्त को यह स्पष्ट कर दिया था कि इस गहरी ऊर्जा समस्या को हल करने में कम से कम दो साल का समय लगेगा, जिससे जल्द राहत मिलने की उम्मीदें खत्म हो गई हैं।
बढ़ती महंगाई और घटती क्रय शक्ति
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक जुलाई 2026 में पॉइंट-टू-पॉइंट सामान्य मुद्रास्फीति दर 8.32% रही, जो पिछले आठ महीनों में सबसे कम है। इसके बावजूद महीने-दर-महीने उपभोक्ता कीमतों में 1.44% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वहीं, राष्ट्रीय वेतन में साल-दर-साल केवल 8.22% की ही वृद्धि हुई है, जिसके कारण आम लोगों की असली खरीदने की ताकत लगातार घट रही है।
महंगाई का आलम यह है कि 20 अगस्त को बांग्लादेश ज्वैलर्स एसोसिएशन (BAJUS) ने 22-कैरेट सोने की कीमत में Tk3,849 प्रति भरी की और बढ़ोतरी कर दी है। इसके बाद वैट समेत सोने की कुल कीमत बढ़कर Tk240,628 हो गई है, जिससे आम आदमी की पहुंच से सोना और दूर हो गया है।
सड़कों पर उतरी जनता
आर्थिक दबाव और बुनियादी सुविधाओं की कमी के कारण लोगों का गुस्सा अब सड़कों पर भी दिखने लगा है। माधाब्दी और नरसिंहड़ी जैसे इलाकों में कामगारों और आम नागरिकों ने लगातार यूटिलिटी सप्लाई बहाल करने की मांग को लेकर प्रदर्शन किए हैं। ढाका से अल जज़ीरा के संवाददाता Tanvir Chowdhury की रिपोर्ट के अनुसार, देश के युवा और आम लोग रहमान सरकार से उस स्थिरता को देने की उम्मीद कर रहे हैं जिसके लिए उन्होंने लड़ाई लड़ी थी।