बांग्लादेश की पूर्व पीएम शेख हसीना ने तोड़ी चुप्पी, छात्र आंदोलन को बताया साजिश, भारत ने पल्ला झाड़ा

बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री Sheikh Hasina ने अपनी सरकार गिरने के दो साल बाद बड़ा बयान दिया है। 5 अगस्त 2026 को एक वर्चुअल संबोधन में उन्होंने आरोप लगाया कि 2024 का छात्र आंदोलन शांतिपूर्ण नहीं था, बल्कि यह एक सुनियोजित अभियान था जिसका उद्देश्य सत्ता परिवर्तन करना था। यह घटनाक्रम तब हुआ जब बांग्लादेश में 2024 की क्रांति की दूसरी सालगिरह मनाई जा रही है। इस मामले की अधिक जानकारी ANI News की रिपोर्ट में देखी जा सकती है।
भारत का रुख और राजनयिक स्थिति
इस वर्चुअल संबोधन के बाद नई दिल्ली ने खुद को पूरी तरह अलग कर लिया है। भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) के प्रवक्ता Randhir Jaiswal ने 4 अगस्त 2026 को स्पष्ट किया कि भारत सरकार का इस कार्यक्रम में कोई हाथ नहीं है और वह व्यक्त किए गए किसी भी विचार का समर्थन नहीं करती है। इस बीच, भारत ने वर्तमान प्रधानमंत्री Tarique Rahman को नई दिल्ली में होने वाले 18वें BRICS समिट के आउटरीच सेशन के लिए आमंत्रित किया है। यह निमंत्रण उन्हें BIMSTEC के अध्यक्ष के रूप में दिया गया है, जिसकी पुष्टि आधिकारिक सूत्रों से हुई है।
बांग्लादेश की चिंता और आगे की कार्रवाई
इस वर्चुअल कार्यक्रम से पहले ही बांग्लादेश सरकार ने भारत के सामने अपनी कड़ी नाराजगी दर्ज कराई थी। 3 अगस्त 2026 को बांग्लादेश के विदेश मामलों के सलाहकार Humaiun Kobir ने ढाका में भारत के उच्चायुक्त Dinesh Trivedi से मुलाकात की थी और कहा था कि इस तरह की गतिविधियां दोनों देशों के आपसी संबंधों पर बुरा असर डाल सकती हैं। भारत ने आश्वासन दिया है कि वह इस मामले को गंभीरता से देख रहा है।
वर्तमान में Bangladesh Nationalist Party (BNP) के नेतृत्व वाली सरकार इस दिन को याद कर रही है। प्रधानमंत्री Tarique Rahman ने आंदोलन को समर्पित एक म्यूजियम बनाने की योजना बनाई है। वहीं, शेख हसीना, जो वर्तमान में भारत में रह रही हैं, ने संकेत दिया है कि वह दिसंबर के आसपास बांग्लादेश वापस लौटेंगी ताकि उन पर लगे कानूनी आरोपों का सामना कर सकें। उनके बेटे Sajeeb Wazed ने इसे एक गंभीर घटना बताया है और कहा है कि Awami League देश में लोकतंत्र की बहाली के लिए प्रतिबद्ध है, जैसा कि विस्तृत रिपोर्ट में बताया गया है।