अमेरिका के प्रतिबंधों को चीन ने किया खारिज, तेहरान के समर्थन में उठाई आवाज़ और बताया गैरकानूनी

Nura Basta18 August 20263 min read67 viewsWorld
अमेरिका के प्रतिबंधों को चीन ने किया खारिज, तेहरान के समर्थन में उठाई आवाज़ और बताया गैरकानूनी

अंतरराष्ट्रीय राजनीति में तनाव एक बार फिर तब बढ़ गया जब Beijing ने अमेरिका द्वारा तेहरान पर लगाए गए एकतरफा प्रतिबंधों को मानने से साफ इनकार कर दिया। चीनी विदेश मंत्रालय ने इन सभी उपायों को पूरी तरह से गैरकानूनी करार दिया है और कहा है कि इन्हें संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की कोई अनुमति नहीं मिली है। यह पूरा मामला 18 अगस्त 2026 को सामने आया जब IRNA News Agency की तरफ से इस संबंध में आधिकारिक बयान जारी किया गया। इस बयान ने वैश्विक स्तर पर एक बड़ी चर्चा छेड़ दी है और खाड़ी देशों के साथ-साथ पूरी दुनिया का ध्यान इस ओर खींच लिया है।

इस्लामाबाद समझौते के खत्म होने के बाद बढ़ा तनाव

यह घटनाक्रम ठीक उस समय सामने आया है जब 60 दिन का इस्लामाबाद समझौता यानी IMOU समाप्त हो गया। यह समझौता 17 अगस्त 2026 को खत्म हुआ जिसे पाकिस्तान और कतर की मध्यस्थता से शुरू किया गया था। इस समझौते का मुख्य मकसद सैन्य अभियानों पर रोक लगाना और ईरान के परमाणु कार्यक्रम तथा प्रतिबंधों के मुद्दों को हल करना था। लेकिन यह तय समयसीमा बिना किसी अंतिम विस्तार या समझौते के समाप्त हो गई। समझौते के खत्म होने के बाद अमेरिका और ईरान के बीच की दूरियां और अधिक बढ़ गईं जिससे क्षेत्रीय स्थिरता पर भी संकट के बादल मंडराने लगे हैं।

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चीन की कानूनी और व्यापारिक नीति

चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Guo Jiakun ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि उनका देश अपने उद्यमों के अधिकारों की रक्षा करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि बीजिंग घरेलू नियमों का पालन करने को प्राथमिकता देता है और क्षेत्रीय स्थिरता उसके लिए सर्वोपरि है। चीनी वाणिज्य मंत्रालय ने मई 2026 में एक आधिकारिक आदेश भी जारी किया था। इस आदेश में 2021 के स्टेट काउंसिल कानून का हवाला देते हुए वाशिंगटन द्वारा पांच निजी चीनी तेल रिफाइनरियों पर लगाए गए प्रतिबंधों को चीनी क्षेत्र के भीतर लागू न होने योग्य और अवैध बताया गया था।

अमेरिका और ईरान का अगला कदम

कूटनीतिक खटास तब और ज्यादा गहरी हो गई जब अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने 18 अगस्त 2026 को इस बात की पुष्टि की कि वह इस अस्थायी युद्धविराम को आगे नहीं बढ़ाएंगे। इसके साथ ही अमेरिकी दूत Jared Kushner ने कहा कि उनका प्रशासन ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने पर पूरी तरह ध्यान केंद्रित कर रहा है। इसके जवाब में ईरान के वरिष्ठ अधिकारियों ने चेतावनी दी कि वे अपनी सैन्य रणनीति को पूरी तरह आक्रामक यानी 'fully offensive' रुख में बदल देंगे। उन्होंने अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी की बहाली और तेल शिपमेंट छूट को रद्द किए जाने को इसका मुख्य कारण बताया।

स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज में बढ़ती मुश्किलें

स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका उन चीनी बैंकों पर दूसरे स्तर के प्रतिबंध यानी secondary sanctions लगाने पर विचार कर रहा है जो ईरानी वित्तीय लेनदेन में मदद करते हैं। दूसरी तरफ चीन अमेरिकी प्रभाव को चुनौती देने के लिए अपने एंटी-फॉरन सैंक्शंस लॉ समेत कई कानूनी हथियारों का इस्तेमाल कर रहा है। इसके जरिए चीन तेल आयात के माध्यम से ईरान को लगातार आर्थिक समर्थन दे रहा है ताकि वहां के हालात को संभाला जा सके और वैश्विक ऊर्जा बाजार पर इसका असर कम से कम पड़े।

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