Bristol से रवाना हुई 'Kate' नाव, गाजा के समुद्री नाकाबंदी को तोड़ने के लिए 12 वालंटियर्स ने भरी हुंकार.

Praggya Singh sabal17 August 20262 min read64 viewsWorld
Bristol से रवाना हुई 'Kate' नाव, गाजा के समुद्री नाकाबंदी को तोड़ने के लिए 12 वालंटियर्स ने भरी हुंकार.

ब्रिटेन के ब्रिस्टल शहर से 12 वालंटियर्स को लेकर एक जहाज जिसका नाम 'Kate' है, उसने सोमवार, 17 अगस्त 2026 को अपनी यात्रा शुरू कर दी है। यह अभियान फ्रीडम फ्लोटिला कोएलिशन के चल रहे उस अभियान का हिस्सा है जिसका मकसद इजराइल द्वारा गाजा पट्टी पर लगाई गई समुद्री नाकाबंदी को चुनौती देना है। इस मिशन को ग्लोबल सुमुद फ्लोटिला का समर्थन प्राप्त है, और इसका मुख्य उद्देश्य फिलिस्तीनी क्षेत्र तक राहत सामग्री पहुंचाना है जो साल 2007 से एक सख्त समुद्री नाकाबंदी के दायरे में रह रहा है। इस रवानगी से पहले के वर्षों में लगातार तनाव बढ़ता रहा है और इजरायली नौसेना द्वारा कई बार जहाजों को रोका गया है, जिनका यह कहना है कि यह नाकाबंदी हथियारों की तस्करी रोकने के लिए एक जरूरी सुरक्षा उपाय है।

अंतरराष्ट्रीय कानून और मानवाधिकार संगठनों की स्थिति

इस नाकाबंदी को लेकर अंतरराष्ट्रीय कानूनी बहसें लगातार जारी हैं, जहां संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार कार्यालय और कई अन्य मानवाधिकार संगठनों का यह तर्क है कि यह प्रतिबंध अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन करता है और सामूहिक सजा के दायरे में आता है। कार्यकर्ताओं को इतिहास में भारी विरोध का सामना करना पड़ा है, जिसमें पिछले अभियानों के प्रतिभागियों ने हिरासत के दौरान शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना, मारपीट और टॉर्चर किए जाने के दावे किए हैं। हालांकि, इजरायली अधिकारियों ने हमेशा से अपने कदमों की वैधता को सही ठहराया है, जिसके लिए उन्होंने यूएन पामर रिपोर्ट और सैन रेमो मैनुअल का हवाला दिया है।

यात्रियों की सुरक्षा और अन्य नजरबंद कार्यकर्ताओं की स्थिति

जैसे ही 'Kate' जहाज ने अपनी समुद्री यात्रा शुरू की है, वैसे ही वालंटियर्स की सुरक्षा को लेकर चिंताएं काफी बढ़ गई हैं। इसके साथ ही, अंतरराष्ट्रीय ध्यान अब अन्य नजरबंद लोगों की स्थिति पर भी केंद्रित हो गया है, जिनमें चार ट्यूनीशियाई कार्यकर्ता शामिल हैं जिन्हें पिछले एक इंटरसेप्शन के बाद से पांच महीने से मोर्नागुइया जेल में रखा गया है। यह पूरा मिशन मानवाधिकार समूहों और इजरायली सरकार के बीच चल रही उस खींचतान को उजागर करता है, जहां मानवीय सहायता देने वाले समूह इजराइल की आधिकारिक निरीक्षण प्रणालियों को दरकिनार करने की कोशिश करते हैं और इजरायली सरकार अपनी समुद्री नीतियों को सख्ती से लागू करती है।

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