लेबनान के लिए कनाडा का बड़ा ऐलान, जंग से प्रभावित लोगों को मिलेगी भारी मानवीय सहायता.

कनाडा ने लेबनान में चल रहे संघर्ष और युद्ध के बीच वहां के नागरिकों के लिए अपनी तिजोरी खोल दी है। कनाडाई सरकार ने युद्ध से प्रभावित परिवारों और महिलाओं की मदद के लिए सहायता राशि में भारी बढ़ोतरी करने की आधिकारिक घोषणा की है। इस बड़े कदम से उन बेघर और पीड़ित लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है जो इस भीषण तबाही का शिकार हुए हैं।
कनाडा की तरफ से करोड़ों रुपये की मदद
कनाडा के अंतरराष्ट्रीय विकास राज्य सचिव Randeep Sarai ने लेबनान का अपना कूटनीतिक दौरा सफलतापूर्वक पूरा किया। अपने इस महत्वपूर्ण दौरे के दौरान उन्होंने यह पुष्टि की कि इस साल लेबनान के लिए कनाडा की कुल सहायता राशि 71 मिलियन कनाडाई डॉलर यानी 50 मिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक हो चुकी है। इस नई फंडिंग का मुख्य उद्देश्य लेबनान में विस्थापित हुए परिवारों और महिलाओं की बुनियादी जरूरतों को पूरा करना है। कनाडाई अधिकारी ने स्पष्ट किया कि उनका देश इस क्षेत्र में लंबे समय तक मदद जारी रखने की नीयत रखता है।
लेबनान के नेताओं के साथ अहम बैठक
अपनी इस यात्रा के दौरान Randeep Sarai ने लेबनान के राष्ट्रपति Joseph Aoun और प्रधानमंत्री Nawaf Salam से मुलाकात की। इन उच्चस्तरीय बैठकों में देश में फिर से सरकारी हुकूमत को मजबूत करने और भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़े सुधार लागू करने पर लंबी चर्चा हुई। इसके अलावा, दक्षिण लेबनान के इलाकों को फिर से बसाने और वहां के हालात सुधारने पर भी विचार-विमर्श किया गया। संयुक्त राष्ट्र के आंकड़ों के मुताबिक, इस युद्ध की वजह से करीब 360,000 लोग अपना घर छोड़ने को मजबूर हो गए हैं, जिन्हें वापस उनके घरों में बसाना एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।
इजराइल-हिजबुल्लाह संघर्ष और मानवीय संकट
अगस्त 2026 के मध्य तक चले इस Israel-Hezbollah युद्ध में अब तक 4,000 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। कनाडाई मंत्री ने लेबनान में इजराइल की सैन्य कार्रवाई की कड़ी आलोचना की और इसे एक गैरकानूनी कदम बताया। उन्होंने कहा कि लेबनान की संप्रभुता का पूरा सम्मान किया जाना चाहिए। देश में चल रहे इस गंभीर संकट के पीछे लेबनान की खराब आर्थिक स्थिति और दक्षिणी इलाकों में इजरायली सैनिकों की मौजूदगी मुख्य वजह है। कनाडाई मंत्री ने स्थानीय राहत शिविरों का दौरा भी किया जहाँ युद्ध से बेघर हुए लेबनानी नागरिकों के साथ-साथ वहां रह रहे सीरियाई शरणार्थियों के हालात का जायजा लिया।