CBI की बड़ी कार्रवाई, लोकसभा सचिवालय फर्जीवाड़ा मामले में 10 साल से फरार आरोपी गिरफ्तार.

केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी CBI ने एक बहुत बड़ी कार्रवाई करते हुए पिछले 10 साल से कानून की आंखों में धूल झोंक रहे एक भगोड़े आरोपी को धर दबोचा है। इस आरोपी का नाम जितेंद्र पाठक है, जो फर्जीवाड़े के एक पुराने मामले में लंबे समय से फरार चल रहा था। केंद्रीय एजेंसी ने तकनीकी जांच और पुख्ता जानकारी के आधार पर पंजाब के लुधियाना शहर में एक विशेष अभियान चलाया और आखिरकार 19 अगस्त 2026 को आरोपी को अपनी गिरफ्त में ले लिया। इस गिरफ्तारी के साथ ही कानून से बचने की उसकी तमाम कोशिशें नाकाम हो गईं और अब उसे अदालत के सामने पेश किया जाएगा।
क्या है पूरा मामला और कैसे दिया गया था फर्जीवाड़े को अंजाम
यह पूरा आपराधिक मामला साल 2009 का है जब CBI ने इस मामले में पहली बार केस दर्ज किया था। शुरुआती जांच में सामने आया था कि आरोपी जितेंद्र पाठक और उसके साथियों ने मिलकर एक आम व्यक्ति के साथ बड़ी ठगी की थी। आरोपी ने खुद को नई दिल्ली स्थित लोकसभा सचिवालय का एक बड़ा कर्मचारी बताया था और पीड़ित को संसद के अंदर पक्की नौकरी दिलाने का झांसा दिया था। नौकरी का लालच देकर आरोपी ने उस शख्स से 50,000 रुपये ऐंठ लिए थे। इस धोखाधड़ी का खुलासा होने के बाद केंद्रीय एजेंसी ने गहन जांच की और दिसंबर 2009 में अदालत के भीतर आरोपी और उसके अन्य साथियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दी थी।
अदालत की कार्रवाई और भगोड़ा घोषित होने की पूरी कहानी
चार्जशीट दाखिल होने के बाद जब मामले की सुनवाई का समय आया तो आरोपी जितेंद्र पाठक अदालत की कार्यवाही में शामिल होना बंद कर दिया और लगातार पेशी से गायब रहने लगा। कानून के मुताबिक सभी जरूरी औपचारिकताओं और कानूनी प्रक्रियाओं को पूरा करने के बाद, सुनवाई कर रही ट्रायल कोर्ट ने 28 सितंबर 2016 को उसे आधिकारिक तौर पर एक भगोड़ा यानी प्रोक्लेमड ऑफेंडर घोषित कर दिया था। इस ताजा गिरफ्तारी के साथ ही उस तलाश का अंत हो गया है जो इस आपराधिक मामले के शुरू होने के बाद से लेकर अब तक कुल 16 साल से अधिक समय से चल रही थी। इस बारे में अधिक जानकारी और आधिकारिक पुष्टि के लिए आप ANI News की रिपोर्ट देख सकते हैं।