चीन ने अमेरिका के नए ईरान प्रतिबंधों को बताया गैरकानूनी, कहा इससे इलाके में बढ़ेगा तनाव।

शुक्रवार, 21 अगस्त 2026 को चीन के विदेश मंत्रालय ने अमेरिका द्वारा ईरान पर लगाए गए नए प्रतिबंधों की कड़ी निंदा की। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने औपचारिक रूप से यह बयान दिया कि बीजिंग इन एकतरफा और अवैध प्रतिबंधों के पूरी तरह खिलाफ है। उन्होंने साफ कहा कि इन पाबंदियों का अंतरराष्ट्रीय कानून में कोई आधार नहीं है और इन्हें संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद द्वारा अधिकृत भी नहीं किया गया है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के प्रशासन के दबाव के बाद चीन का यह आधिकारिक रुख सामने आया है, जिन्होंने हाल ही में तेहरान के खिलाफ आर्थिक दंड को और अधिक बढ़ाने की घोषणा की थी।
अमेरिका का आर्थिक अलगाव का प्लान
इस पूरी कार्रवाई के बाद, अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेन्ट ने इन कदमों को इतिहास के सबसे कड़े प्रतिबंध बताया। उनका मुख्य उद्देश्य दुनिया के इतिहास में सबसे बड़ी समन्वित आर्थिक अलगाव नीति को लागू करना था। इसके साथ ही, सचिव बेसेन्ट ने बीजिंग से अंतरराष्ट्रीय प्रयासों में शामिल होने का आग्रह किया और सुझाव दिया कि चीन को इन नीतियों के पालन के मामले में अब लाइन पर आना चाहिए। दुनिया भर के देशों से यह मांग की गई कि वे ईरानी अर्थव्यवस्था को पूरी तरह से अलग-थलग कर दें ताकि उनकी वित्तीय स्थिति को कमजोर किया जा सके।
तनाव कम करने के लिए राजनीतिक रास्ते अपनाने की अपील
वैश्विक साझेदारों द्वारा ईरान की अर्थव्यवस्था को अलग-थलग करने की अमेरिकी मांग का जवाब देते हुए, प्रवक्ता लिन जियान ने कहा कि इस तरह के प्रतिबंध और दबाव किसी भी समस्या को हल करने में मदद नहीं करेंगे। उन्होंने आगे जोड़ा कि इन कदमों से केवल क्षेत्रीय तनाव में और ज्यादा बढ़ोतरी होती है। चीन ने औपचारिक रूप से सभी संबंधित पक्षों से यह अपील की कि वे आर्थिक युद्ध के बजाय राजनीतिक और कूटनीतिक माध्यमों से किसी समाधान की तरफ बढ़ें और जिम्मेदार उपायों को अपनाएं। दूसरी तरफ, तेहरान ने इन नए उपायों को सिरे से खारिज कर दिया और अमेरिकी नीति को आधिकारिक तौर पर आर्थिक आतंकवाद करार दिया, साथ ही बढ़ते वित्तीय दबाव के सामने डटकर खड़े रहने की कसम खाई।