Strait of Hormuz में टैंकरों पर ड्रोन हमले से कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल, UAE और खाड़ी देशों में चिंता बढ़ी.

दुनियाभर में कच्चे तेल यानी क्रूड ऑयल की कीमतों में 14 अगस्त 2026 को अचानक बड़ा उछाल देखने को मिला है। होर्मुज जलडमरूमध्य यानी Strait of Hormuz में हाल ही में हुए ड्रोन हमलों के कारण ग्लोबल मार्केट में हलचल मच गई है और तेल की कीमतें तेजी से ऊपर चढ़ गई हैं। ब्रेंट क्रूड बढ़कर $88.52 प्रति बैरल और WTI क्रूड $82.40 प्रति बैरल पर बंद हुआ, जिससे इस हफ्ते कीमतों में बड़ी तेजी दर्ज की गई है। इस घटना से खाड़ी देशों में रहने वाले लोगों और नौकरी करने वाले प्रवासियों के बीच भी चिंता का माहौल बन गया है, क्योंकि इसका सीधा असर वैश्विक अर्थव्यवस्था और महंगाई पर पड़ता है।
होर्मुज जलडमरूमध्य में हमलों का सिलसिला और यूएई के टैंकर
मिली जानकारी के अनुसार, यह पूरा संकट 13 अगस्त को तब शुरू हुआ जब होर्मुज जलडमरूमध्य के पास यूएई से जुड़े दो तेल टैंकरों को ड्रोनों द्वारा निशाना बनाया गया। इस घटना के बाद से अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊर्जा आपूर्ति को लेकर डर का माहौल पैदा हो गया है। यूनाइटेड किंगडम मैरिटाइम ट्रेड ऑपरेशंस यानी UKMTO ने अपनी आधिकारिक रिपोर्ट में पुष्टि की है कि जुलाई की शुरुआत से लेकर अब तक इस क्षेत्र में कुल 20 प्रोजेक्टाइल स्ट्राइक या हमले हो चुके हैं। इन लगातार हमलों के बाद कतर, बहरीन, कुवैत और मिस्र समेत कई देशों ने कड़ी निंदा की है और समुद्री सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है.
अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता में गतिरोध
बाजार में इस भारी उतार-चढ़ाव और अस्थिरता के पीछे अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ताओं का पूरी तरह से ठप होना भी एक बड़ा कारण है। अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत में कोई प्रगति नहीं हो पाई है, जिससे स्थिति और ज्यादा गंभीर हो गई है। अमेरिका के ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेन्ट ने चेतावनी दी है कि यदि बातचीत से कोई समाधान नहीं निकला तो आने वाले समय में अभूतपूर्व आर्थिक उपाय किए जाएंगे और अनिश्चितकालीन नौसैनिक नाकेबंदी भी लागू की जा सकती है। अमेरिका ने इस क्षेत्र में अपनी नौसेना की मौजूदगी को बहुत मजबूत कर दिया है और नियमों का पालन कराने के लिए अब तक 62 कमर्शियल जहाजों का मार्ग भी बदल दिया है।
खाड़ी देशों में रह रहे प्रवासियों पर संभावित असर
विशेषज्ञों का मानना है कि Strait of Hormuz में जहाजों की आवाजाही रुकने और भू-राजनीतिक तनाव बढ़ने से ग्लोबल एनर्जी सप्लाई चेन पर बहुत बड़ा जोखिम मंडरा रहा है। यूएई, सऊदी अरब, बहरीन और ओमान जैसे देशों में काम करने वाले लाखों भारतीय और अन्य देशों के प्रवासी इस स्थिति पर बारीक नजर बनाए हुए हैं। तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और समुद्री रास्तों में रुकावट के कारण आने वाले दिनों में लॉजिस्टिक्स और परिवहन से जुड़ी लागत प्रभावित हो सकती है, जिसका अप्रत्यक्ष असर आम आदमी के जीवन पर पड़ना तय माना जा रहा है। सरकारें और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां सुरक्षा और सप्लाई को सामान्य बनाने के लिए लगातार काम कर रही हैं ताकि वैश्विक स्तर पर ईंधन की कमी न हो.