Dubai DIFC Courts में ग्लोबल मामलों की बाढ़, 2026 के पहले छह महीनों में पहुंचे 810 से ज्यादा केस.

दुबई इंटरनेशनल फाइनेंशियल सेंटर यानी DIFC Courts ने साल 2026 के पहले छह महीनों में अपने विवाद समाधान मामलों में भारी बढ़ोतरी दर्ज की है। कोर्ट द्वारा 18 अगस्त 2026 को जारी किए गए आंकड़ों के मुताबिक, इस दौरान कुल 810 नए मामले दर्ज किए गए, जो पिछले साल की तुलना में 25 प्रतिशत ज्यादा हैं। इन मामलों में दुनिया भर के लोगों और कंपनियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया है, जिससे यह साफ होता है कि लोग अपनी मर्जी से इस अदालत को चुन रहे हैं।
ऑप्ट-इन मामलों में आई रिकॉर्ड तेजी
इस साल की शुरुआत से ही अदालतों में ऐसे मामलों की संख्या बढ़ी है जिन्हें अनुबंध के जरिए चुना जाता है, जिन्हें opt-in cases कहा जाता है। कुल दर्ज मामलों में से 243 मामले ऐसे थे जिन्हें पार्टियों ने खुद DIFC के दायरे में लाने का फैसला किया। ये मामले यूएई के अलावा पांच महाद्वीपों के 22 अलग-अलग देशों से जुड़े हुए थे। इनमें से 201 मामले स्मॉल क्लेम्स ट्रिब्यूनल के जरिए आए, जबकि बाकी के मामले कोर्ट ऑफ फर्स्ट इंस्टेंस, आर्बिट्रेशन डिवीजन और डिजिटल इकोनॉमी कोर्ट में बांटे गए।
खास बात यह है कि कोर्ट ऑफ फर्स्ट इंस्टेंस में आने वाले मामलों में से लगभग आधे यानी 50 प्रतिशत मामलों में विदेशी पार्टियां शामिल थीं। ये लोग भारत, सऊदी अरब, ओमान, जर्मनी, स्विट्जरलैंड, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया जैसे 13 अलग-अलग देशों से ताल्लुक रखते थे। कुछ मामलों में तो यूएई का स्थानीय निवासी या कंपनी शामिल भी नहीं थी, फिर भी उन्होंने दुबई की इस अदालत पर भरोसा जताया।
करोड़ों और अरबों रुपये के दावों का निपटारा
अदालत में आने वाले मामलों की कुल राशि भी काफी ज्यादा रही है। पहले छह महीनों में कुल मुकदमों की वैल्यू 10.02 अरब दिरहम यानी लगभग 2.73 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गई। यह आंकड़ा पिछले साल के मुकाबले 48 प्रतिशत ज्यादा है। अगर रोजाना के हिसाब से देखें तो हर दिन औसतन 55 मिलियन दिरहम के दावे दर्ज किए गए। इसके अलावा आर्बिट्रेशन डिवीजन में 37 दावे दर्ज किए गए, जो पिछले साल से 61 प्रतिशत अधिक हैं और इनकी कुल वैल्यू 3.17 अरब दिरहम थी। डिजिटल तकनीक का इस्तेमाल करते हुए 99 प्रतिशत सुनवाई ऑनलाइन ही पूरी की गई।
अधिकारियों का बयान और आगे की योजनाएं
DIFC Courts के निदेशक H.E. Justice Omar Al Mheiri ने बताया कि ये आंकड़े इस बात की गवाही देते हैं कि लोग इस न्याय प्रणाली को खुद चुनते हैं। उन्होंने कहा कि एक स्वतंत्र, डिजिटल और आसानी से मिलने वाला न्याय तंत्र व्यापारिक भरोसे को मजबूत करता है और दुबई इकोनॉमिक एजेंडा D33 का पूरा समर्थन करता है। दिसंबर 2025 में नई पांच साल की रणनीति लागू होने के बाद यह पहला मौका है जब इतने बड़े आंकड़े सामने आए हैं।
लोगों को और सुविधाएं देने के लिए DIFC लगातार नए कदम उठा रहा है। जून 2026 में कोर्ट ने आर्बिट्रेशन कानून को नए मीडिएशन फ्रेमवर्क के साथ मिलाने के लिए एक पब्लिक कंसल्टेशन शुरू किया था। इसके अलावा 1 जुलाई से 31 दिसंबर 2026 तक एक कमर्शियल मीडिएशन स्कीम भी चलाई जा रही है। इसके तहत योग्य लोगों को एक घंटे की फ्री कंसल्टेशन और मीडिएशन फीस में 50 प्रतिशत की छूट दी जा रही है। इस योजना को मीडिएशन हब MENA और दुबई डिपार्टमेंट ऑफ इकोनॉमी एंड टूरिज्म के सहयोग से शुरू किया गया है।