Donald Trump ने ईरान पर हमले की योजना रोकी, कहा- बातचीत के जरिए तनाव कम करने का बना समझौता

Sushma Kumari9 August 20263 min read72 viewsWorld
Donald Trump ने ईरान पर हमले की योजना रोकी, कहा- बातचीत के जरिए तनाव कम करने का बना समझौता

पश्चिम एशिया में मचे भारी तनाव के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान पर होने वाली संभावित सैन्य कार्रवाई को रोकने का बड़ा दावा किया है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने साफ किया कि अमेरिका इस बार ईरान पर हमला करने के लिए पूरी तरह से तैयार बैठा था, लेकिन ऐन वक्त पर एक संभावित समझौते की रूपरेखा तैयार होने की वजह से उन्होंने इस खतरनाक सैन्य कदम को रद्द करने का फैसला लिया।

ट्रुथ सोशल पर दी जानकारी

रूस की अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी Russia Today और तुर्किए की सरकारी एजेंसी Anadolu Agency की रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर लिखा कि इस प्रस्तावित समझौते के तहत होर्मुज जलडमरूमध्य यानी Strait of Hormuz को पूरी तरह से खोला जाना शामिल है। साथ ही इसके जरिए ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़े तमाम खतरों को भी पूरी तरह खत्म करने की बात कही गई है। ट्रंप ने दावा किया कि ईरान और कुछ अन्य मध्य-पूर्वी देशों के खास अनुरोध पर ही उन्होंने यह बड़ा फैसला लिया है।

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अमेरिकी राष्ट्रपति ने आगे बताया कि अमेरिका के पास द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से ऐसी जबरदस्त सैन्य ताकत मौजूद थी जिसके साथ वह इस कार्रवाई को अंजाम दे सकते थे, लेकिन क्षेत्र में शांति और स्थिरता को प्राथमिकता देते हुए हमला रोकने पर सहमति बनी। ट्रंप के मुताबिक, इस पूरी प्रक्रिया में इजराइल यानी Israel भी पूरी तरह से अमेरिका के साथ खड़ा है।

ईरान ने दावों को किया सिरे से खारिज

हालांकि, ईरान की तरफ से राष्ट्रपति ट्रंप के इन तमाम दावों को पूरी तरह से खारिज कर दिया गया है। ईरानी अधिकारियों का साफ कहना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने को लेकर किसी भी प्रकार का कोई समझौता नहीं हुआ है। ईरानी सूत्रों के मुताबिक, जब तक अमेरिका अपनी शत्रुतापूर्ण और आक्रामक कार्रवाई बंद नहीं करता, तब तक इस समुद्री मार्ग पर मौजूदा स्थिति जैसी है वैसी ही बनी रहेगी।

इससे पहले अमेरिका की कई मीडिया रिपोर्ट्स में यह दावा किया गया था कि अमेरिका और इजराइल मिलकर ईरान के मुख्य ऊर्जा ढांचे को निशाना बनाने के लिए एक बहुत बड़े सैन्य अभियान की तैयारी कर रहे थे। इन संभावित हमलों में ईरान के बिजली संयंत्रों और तेल रिफाइनरियों को पूरी तरह तबाह करने की चर्चा जोरों पर थी।

सऊदी अरब की मध्यस्थता और अपील

इस बढ़ते तनाव के बीच खाड़ी देश सऊदी अरब यानी Saudi Arabia ने भी दोनों देशों से अपील की है कि वे किसी भी सैन्य टकराव के बजाय बातचीत के जरिए ही इस समस्या का समाधान निकालें। रिपोर्ट्स के अनुसार, सऊदी क्राउन प्रिंस Mohammed bin Salman ने हाल ही में ट्रंप के साथ टेलीफोन पर बातचीत की थी और क्षेत्रीय अस्थिरता के साथ-साथ खाड़ी देशों के ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर संभावित जवाबी हमलों को लेकर अपनी गहरी चिंता जताई थी।

पाकिस्तान और कतर निभा रहे हैं मध्यस्थ की भूमिका

फिलहाल अमेरिका और ईरान के बीच सीधी बातचीत दोबारा शुरू होने को लेकर कोई आधिकारिक तारीख और स्थान तय नहीं किया गया है। पाकिस्तानी अधिकारियों के अनुसार, इस समय पाकिस्तान और कतर यानी Qatar दोनों देशों के बीच पर्दे के पीछे रहकर मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं और लगातार संपर्क में हैं। ईरान के विदेश मंत्रालय ने भी स्पष्ट किया है कि अभी अमेरिका के साथ कोई सीधी बातचीत नहीं चल रही है, लेकिन तनाव को कम करने के लिए गोपनीय स्तर पर मध्यस्थों के माध्यम से प्रयास जारी हैं।

संभावित वार्ता के लिए कतर की राजधानी दोहा और पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद जैसे स्थानों पर विचार किया जा रहा है। शुरुआती बातचीत में परमाणु मुद्दे पर बात करने के बजाय मुख्य रूप से युद्धविराम को बनाए रखने, क्षेत्रीय तनाव को घटाने और होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर एक सुरक्षित व्यवस्था बनाने पर ही पूरा ध्यान केंद्रित किए जाने की संभावना जताई जा रही है।

बता दें कि होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे अहम समुद्री मार्गों में से एक माना जाता है, जहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का एक बहुत बड़ा हिस्सा दुनिया भर के देशों में पहुंचता है। इस महत्वपूर्ण मार्ग पर किसी भी प्रकार का संकट सीधे तौर पर अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजारों और कच्चे तेल की कीमतों को प्रभावित कर सकता है, जिसका असर आम जनता की जेब पर भी पड़ सकता है।

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