Dubai Airport का बड़ा बदलाव: अब बिना पासपोर्ट के कर सकेंगे सफर, AI सिस्टम से होगा इमिग्रेशन

Nura Basta4 August 20262 min read49 viewsUAE
Dubai Airport का बड़ा बदलाव: अब बिना पासपोर्ट के कर सकेंगे सफर, AI सिस्टम से होगा इमिग्रेशन

दुबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट (DXB) पर अब यात्रा का अनुभव पूरी तरह से बदलने जा रहा है। दुबई ने एक ऐसी नई तकनीक पेश की है जिससे यात्रियों को इमिग्रेशन काउंटर पर न तो पासपोर्ट दिखाना होगा और न ही किसी लंबी कतार में खड़ा होना पड़ेगा। यह नई व्यवस्था AI यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर आधारित है, जो कैमरे की मदद से ही यात्री की पहचान कर लेगी। इस नई सुविधा को General Directorate of Residency and Foreigners Affairs (GDRFA Dubai) ने तैयार और लागू किया है, जिससे अब एयरपोर्ट पर लंबी कागजी प्रक्रिया खत्म होने वाली है।

कैसे काम करेगा यह नया सिस्टम

यह आधुनिक सिस्टम 2 जून 2026 से दुबई एयरपोर्ट के टर्मिनल 3 पर काम करना शुरू कर चुका है। इसे 'Travel Without Borders' रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। जब कोई यात्री एयरपोर्ट के गलियारे से गुजरता है, तो वहां लगे हाई-टेक कैमरे चेहरे की पहचान यानी फेशियल रिकग्निशन तकनीक का उपयोग करके रियल-टाइम में यात्री की पुष्टि कर लेते हैं। इस प्रक्रिया में एक बार में 10 यात्री एक साथ गुजर सकते हैं। इससे किसी भी यात्री का डेटा चेक करने में केवल 3.4 सेकंड का समय लगता है, जो पहले की तुलना में लगभग 60 प्रतिशत तेज है। Al Jazeera English की 4 अगस्त 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, इस तकनीक ने सुरक्षा और सुविधा के नए मानक तय किए हैं।

प्रवासियों के लिए बड़ी राहत

दुबई में काम करने वाले लाखों भारतीय और अन्य प्रवासी जो अक्सर यात्रा करते हैं, उनके लिए यह खबर काफी राहत देने वाली है। इस नई सुविधा का नाम 'Travel Without Borders – Red Carpet' रखा गया है। आंकड़ों के अनुसार, इस साल जनवरी से जून 2026 के बीच 9.4 मिलियन से अधिक यात्रियों ने दुबई के स्मार्ट ट्रैवल सिस्टम का लाभ उठाया है। इनमें से 439,321 यात्रियों ने रेड कार्पेट सर्विस का उपयोग किया है। फिलहाल यह सुविधा फर्स्ट और बिजनेस क्लास के यात्रियों के लिए ट्रायल के तौर पर शुरू की गई है, जिसे जल्द ही सभी यात्रियों के लिए उपलब्ध कराया जाएगा। GDRFA के डायरेक्टर जनरल Lieutenant General Mohammed Ahmed Al Marri ने बताया कि इस प्रक्रिया में यात्री का डेटा उनके आने से पहले ही प्रोसेस कर लिया जाता है, जिससे भौतिक दस्तावेजों की जरूरत पूरी तरह से खत्म हो गई है। हालांकि, विशेषज्ञ अभी भी डेटा सुरक्षा और रोजगार पर इसके प्रभाव को लेकर चर्चा कर रहे हैं।

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