London में Sudan विवाद को लेकर घिरे Dubai के Ruler, बीच सड़क पर शख्स ने लगाए गंभीर आरोप.

रविवार, 10 अगस्त 2026 को लंदन के पॉश इलाके नाइट्सब्रिज में एक बड़ी घटना सामने आई जहाँ दुबई के शासक और यूएई के उपराष्ट्रपति व प्रधानमंत्री Sheikh Mohammed bin Rashid Al-Maktoum को एक सूडानी नागरिक ने सड़क पर घेर लिया। इस दौरान उस व्यक्ति ने संयुक्त अरब अमीरात यानी यूएई पर सूडान में चल रहे गृहयुद्ध और हिंसा को बढ़ावा देने का आरोप लगाया। शख्स ने चिल्लाते हुए कहा कि यूएई उनके देश के लोगों की जान ले रहा है और इस दौरान उसने यूएई के राष्ट्रपति Mohammed bin Zayed का नाम भी लिया। इस तीखी झड़प के दौरान शासक के सुरक्षा दल के एक सदस्य ने गुस्से में आकर नस्लीय टिप्पणियां कीं, जिससे मामला और ज्यादा गर्मा गया।
सूडान संघर्ष और यूएई पर अंतरराष्ट्रीय आरोप
यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब पूरी दुनिया में यह बात कही जा रही है कि यूएई सूडान के अर्धसैनिक बल रैपिड सपोर्ट फोर्सेज यानी RSF को हथियार और रसद मुहैया करा रहा है। आपको बता दें कि इसी आरएसएफ संगठन पर दारफुर क्षेत्र में बड़े पैमाने पर नरसंहार करने के गंभीर आरोप लगे हैं। संयुक्त राष्ट्र और रॉयटर्स की जांच रिपोर्टों में भी इस बात का दावा किया गया है कि लीबिया और चाड के रास्ते आरएसएफ तक हथियार पहुंचाने के लिए एक एयर ब्रिज का इस्तेमाल किया जा रहा है, जो सूडान पर लगाए गए संयुक्त राष्ट्र के हथियार प्रतिबंध का उल्लंघन हो सकता है। इसके अलावा सूडान सरकार ने इस मामले में इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस में भी केस दर्ज कराया है और यूएई पर जिनेवा कन्वेंशन के उल्लंघन का आरोप मढ़ा है।
यूएई सरकार का आधिकारिक रुख और अमेरिकी सीनेटर का बयान
इन तमाम गंभीर आरोपों के बीच यूएई सरकार ने हमेशा से आरएसएफ को किसी भी तरह का समर्थन देने से साफ इनकार किया है। यूएई के विदेश मंत्रालय ने पहले भी सूडान में सैन्य संघर्ष को लेकर अपनी गहरी चिंता जताई थी और देश में स्थायी युद्धविराम लागू करने की मांग की थी। मंत्रालय ने नागरिकों को निशाना बनाने की घटनाओं की कड़ी निंदा भी की है, जिसकी अधिक जानकारी आप UAE MOFA Official Website पर देख सकते हैं। हालांकि इन आधिकारिक खंडनों के बाद भी अमेरिका में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है और 6 अगस्त 2026 को अमेरिकी सीनेटर Chris Van Hollen ने अमेरिकी प्रशासन से यह अपील की कि यूएई को दिए जाने वाले हथियारों की बिक्री पर रोक लगाई जाए। इसके अलावा मानवाधिकार संगठनों ने भी ब्रिटेन सरकार की चुप्पी पर सवाल उठाए हैं क्योंकि ब्रिटेन और यूएई के बीच गहरे आर्थिक संबंध हैं।