विदेश मंत्री एस जयशंकर ने दुनिया के सामने रखी बड़ी बात, बताए वैश्विक संकट से निपटने के 4 नए रास्ते

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने शनिवार, 22 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में आयोजित इकोनॉमिक टाइम्स वर्ल्ड लीडर्स फोरम 2026 में दुनिया के मौजूदा हालातों पर खुलकर बात की। उन्होंने दुनिया के सामने आ रही मुश्किलों को आसान भाषा में समझाते हुए तीन 'सी' यानी कंपटीशन, कॉन्फ्लिक्ट और चोक पॉइंट्स का जिक्र किया। उनके इस बयान से पूरी दुनिया में चल रही उथल-पुथल की तस्वीर साफ नजर आती है।
वैश्विक हालात और तीन 'सी' का मतलब
विदेश मंत्री ने बताया कि आज के समय में देशों के बीच आपस में आगे निकलने की होड़ यानी कंपटीशन बहुत ज्यादा बढ़ गई है। जब देश अपने हितों को पूरा करने के लिए आक्रामक रुख अपनाते हैं, तो यह होड़ अक्सर लड़ाई या विवाद यानी कॉन्फ्लिक्ट में बदल जाती है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि यूक्रेन-रूस युद्ध अब अपने पांचवें साल में चल रहा है और पश्चिम एशिया में भी लगातार अशांति बनी हुई है। इन दोनों मामलों में फिलहाल शांति की कोई साफ उम्मीद दूर-दूर तक दिखाई नहीं दे रही है।
इसके अलावा उन्होंने चोक पॉइंट्स के बारे में बताया कि जब कोई देश या ताकतवर समूह किसी खास क्षेत्र में अपनी हुकूमत का फायदा उठाकर दूसरों पर दबाव बनाता है, तो उसे चोक पॉइंट कहा जाता है। ऐसा करने वाले अक्सर यह भूल जाते हैं कि दूसरों को नुकसान पहुंचाने का असर उन पर भी लौटकर आ सकता है।
संकट से निपटने के लिए चार 'डी' का फार्मूला
इस जटिल स्थिति से पार पाने के लिए विदेश मंत्री ने चार 'डी' वाला रणनीतिक फॉर्मूला पेश किया है, जिसमें डरिस्किंग, डाइवर्सिफिकेशन, डीलिंग विद डिस्टॉरशंस और बिल्डिंग ए मार्जिन ऑफ सेफ्टी शामिल हैं। उन्होंने बिजनेस करने वाले लोगों और कंपनियों से साफ तौर पर कहा कि अब पुराने तरीकों को छोड़कर आगे बढ़ने का वक्त आ गया है।
उन्होंने कंपनियों को सलाह दी कि वे सिर्फ सबसे कम लागत वाले 'जस्ट-इन-टाइम' सप्लाई चेन मॉडल पर निर्भर रहने के बजाय 'डिस्ट्रस्ट एंड डाइवर्सिफिकेशन' यानी भरोसा कम करने और अलग-अलग विकल्प तलाशने के रास्ते पर चलें। वैश्विक ऊर्जा बाजारों का उदाहरण देते हुए उन्होंने जोर देकर कहा कि भविष्य की अनिश्चितताओं से निपटने के लिए सप्लाई चेन को मजबूत करना और लागत के तरीकों पर दोबारा विचार करना बहुत जरूरी है ताकि आने वाले समय की मुश्किलों से आसानी से निपटा जा सके।