काहिरा में हुई बड़ी बैठक, मिस्र और फिलिस्तीन के नेताओं ने राष्ट्रीय एकता और चुनावों पर की चर्चा

रविवार, 23 अगस्त 2026 को मिस्र की राजधानी काहिरा में एक अहम बैठक आयोजित की गई। इस उच्च स्तरीय बैठक में मिस्र की जनरल इंटेलिजेंस सर्विस के प्रमुख मेजर जनरल हसन रशाद ने फिलिस्तीनी autoridad (PA) के एक प्रतिनिधिमंडल के साथ औपचारिक चर्चा की। इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व फिलिस्तीनी उपाध्यक्ष हुसैन अल-शेख कर रहे थे, जिसमें फिलिस्तीनी नेशनल काउंसिल के चेयरमैन रॉवी फत्तौह और फिलिस्तीनी इंटेलिजेंस चीफ माजिद फराज भी शामिल थे।
मिस्र और फिलिस्तीन के बीच उच्च स्तर पर हुई बातचीत
सरकारी मीडिया आउटलेट अल-कहिएरा न्यूज और शिन华 के माध्यम से सामने आई रिपोर्टों के मुताबिक, बैठक के दौरान फिलिस्तीनी उपाध्यक्ष हुसैन अल-शेख ने फिलिस्तीनी राष्ट्रपति महमूद अब्बास की तरफ से मिस्र के राष्ट्रपति अब्देद फत्ताह अल-सिसी को औपचारिक शुभकामनाएं दीं। बातचीत का मुख्य केंद्र फिलिस्तीनी मुद्दे के सामने आ रही गंभीर चुनौतियों से निपटने के लिए राष्ट्रीय प्रयासों को एकजुट करना था। इसके साथ ही, फिलिस्तीनी सुलह को आगे बढ़ाने और देश में राष्ट्रीय एकता को फिर से बहाल करने पर भी विशेष जोर दिया गया।
आगामी चुनावों और घरेलू मामलों पर चर्चा
इस महत्वपूर्ण मुलाकात के दौरान देश के भीतर चल रहे घटनाक्रमों और आगामी चुनावी मील के पत्थरों की तैयारियों पर भी विस्तार से बात की गई। फिलिस्तीनी राष्ट्रपति महमूद अब्बास ने पहले ही 9 जुलाई 2026 को एक डिक्री जारी की थी, जिसके तहत 28 नवंबर 2026 को विधायी चुनावों के लिए तारीख तय की गई है। इस बैठक से ठीक एक दिन पहले यानी शनिवार, 22 अगस्त 2026 को हुसैन अल-शेख ने यह स्पष्ट कर दिया था कि ये चुनाव तय समय पर ही संपन्न होंगे। उन्होंने यह भी बताया कि यदि किसी विशेष क्षेत्र में मतदान में कोई रुकावट आती है, तो उसके लिए वैकल्पिक योजनाएं भी तैयार रखी गई हैं।
गाजा पट्टी की स्थिति और युद्धविराम पर विचार
बैठक में केवल चुनावों तक ही सीमित नहीं रहा मामला, बल्कि इसमें गाजा पट्टी में चल रहे हालातों पर भी गहन विचार-विमर्श किया गया। काहिरा लगातार फिलिस्तीनी गुटों के बीच आंतरिक वार्ताओं और संभावित संघर्ष विराम समझौते से जुड़े मध्यस्थता प्रयासों की मेजबानी कर रहा है। मिस्र हमेशा से फिलिस्तीनी मामलों में शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए मध्यस्थ की भूमिका निभाता आया है, और यह बैठक उसी दिशा में एक और बड़ा कदम साबित हुई है। इस प्रकार की वार्ताओं से क्षेत्र में शांति बहाली की उम्मीदों को बल मिलता है और आम जनता के जीवन पर पड़ने वाले प्रभावों को कम करने में मदद मिलती है।