UAE, सऊदी अरब और कई देशों ने इसराइल की नई बस्ती योजनाओं को नकारा, जारी हुआ संयुक्त बयान.

हाल ही में 8 देशों के विदेश मंत्रियों ने मिलकर इसराइल की अवैध बस्तियों और विस्तार योजनाओं के खिलाफ एक कड़ा और संयुक्त बयान जारी किया है। इस संयुक्त बैठक में यूएई, सऊदी अरब, कतर, जॉर्डन, इंडोनेशिया, पाकिस्तान, तुर्की और मिस्र के विदेश मंत्री शामिल हुए थे। इन सभी नेताओं ने मिलकर इसराइल की तरफ से चलाई जा रही बस्तियों की नीतियों को सिरे से खारिज किया और क्षेत्रीय शांति के लिए इसे बड़ा खतरा बताया।
ईवन योजना को लेकर जताई गहरी चिंता
21 अगस्त 2026 को जारी किए गए इस बयान में मंत्रियों ने विशेष तौर पर ‘ईवन’ (E1) बस्ती योजना और उससे जुड़ी गतिविधियों पर कड़ी आपत्ति जताई। यह योजना पूर्वी यरूशलेम के पूर्व में बस्तियों का विस्तार करने से जुड़ी है। मंत्रियों का कहना था कि यह कदम पूरी तरह से अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों के खिलाफ है। इस योजना के कारण वेस्ट बैंक और पूर्वी यरूशलेम के बीच का भौगोलिक संपर्क टूट जाएगा, जिससे स्वतंत्र फिलिस्तीनी राष्ट्र बनाने के सपने को बड़ा झटका लगेगा।
बैठक में शामिल देशों के प्रतिनिधियों ने स्पष्ट किया कि 1967 की सीमाओं के आधार पर पूर्वी यरूशलेम को राजधानी बनाकर स्वतंत्र फिलिस्तीनी राज्य का गठन ही शांति का एकमात्र रास्ता है। मंत्रियों ने इस बात पर भी जोर दिया कि इस तरह की योजनाएं अंतरराष्ट्रीय शांति प्रयासों को चुनौती देती हैं, जिसमें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की व्यापक योजना भी शामिल है, जो जबरन विस्थापन और बस्तियों के अधिग्रहण का विरोध करती है।
हिंसा और जवाबदेही पर सख्त रुख
बयान में इस बात का भी जिक्र किया गया कि इसराइली अधिकारियों के समर्थन से बस्तियों में रहने वाले लोग फिलिस्तीनियों और उनकी संपत्ति पर लगातार हमले कर रहे हैं। इन हिंसक घटनाओं को अंतरराष्ट्रीय नियमों का खुला उल्लंघन बताया गया। मंत्रियों ने मांग की कि अवैध बस्तियों को बढ़ावा देने या उसमें आर्थिक मदद देने वाले लोगों और संगठनों के खिलाफ सख्त अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध लगाए जाने चाहिए ताकि इस तरह की गतिविधियों पर रोक लग सके।
अंत में सभी देशों ने मिलकर ‘ईवन’ योजना को तुरंत प्रभाव से बंद करने और भौगोलिक व जनसांख्यिकीय स्थिति को बदलने वाले सभी फैसलों को वापस लेने की मांग की। साथ ही संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की गई कि वे आगे आएं और फिलिस्तीनी जनता के अधिकारों की रक्षा करते हुए उनके स्वतंत्र देश की स्थापना को सुनिश्चित करें।