EU प्रमुख का इसराइल को कड़ा निर्देश, वेस्ट बैंक सेटलमेंट प्लान तुरंत रोकने की मांग

यूरोपीय संघ यानी EU की विदेश नीति प्रमुख काजा कलास ने इसराइल के सामने एक बड़ी मांग रखी है। उन्होंने इसराइल सरकार से कहा है कि वे कब्जे वाले वेस्ट बैंक में चल रहे E1 सेटलमेंट प्लान को तुरंत रोक दें। इस मामले को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काफी नाराजगी देखने को मिल रही है और सभी बड़े देश इसराइल के इस कदम के खिलाफ खड़े हो गए हैं।
क्या है पूरा मामला और योजना
इसराइल सरकार ने हाल ही में 18 अगस्त 2026 को एक टेंडर जारी किया था। इसके तहत वेस्ट बैंक में कुल 1,234 हाउसिंग यूनिट्स यानी घरों का निर्माण किया जाना है। इस पूरी E1 परियोजना के तहत लगभग 3,400 नए मकान बनाए जाने की योजना है। यूरोपीय संघ की नेता काजा कलास ने 23 अगस्त 2026 को साफ शब्दों में कहा कि इस तरह के निर्माण कार्यों से वेस्ट बैंक दो हिस्सों में बंट जाएगा। इसके अलावा पूर्वी येरुसलम भी अलग-थलग पड़ जाएगा, जिससे आने वाले समय में दो-राज्य समाधान की उम्मीदों को बड़ा झटका लगेगा।
यूरोपीय देशों और अरब देशों का कड़ा विरोध
इस बीच यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने भी इसराइल के इस कदम को पूरी तरह अस्वीकार्य बताया है। इसराइल के आवास मंत्रालय द्वारा 21 अगस्त 2026 को टेंडर प्रकाशित करने के बाद से ही कूटनीतिक दबाव काफी बढ़ गया है। इससे पहले यूनाइटेड किंगडम, फ्रांस, जर्मनी, इटली, नीदरलैंड, कनाडा और नॉर्वे जैसे देशों ने मिलकर एक संयुक्त बयान जारी किया था। उन्होंने चेतावनी दी थी कि यह योजना क्षेत्रीय अखंडता को नुकसान पहुंचाती है और साथ ही निर्माण कंपनियों को भी इस प्रोजेक्ट से दूर रहने की हिदायत दी थी। इस बारे में अधिक जानकारी ReliefWeb रिपोर्ट और NewsOnAir अपडेट में दी गई है।
दूसरी तरफ 21 अगस्त को आठ अरब और इस्लामिक देशों ने भी इस फैसले की कड़ी निंदा की। इन देशों में यूएई, सऊदी अरब, कतर, जॉर्डन, इंडोनेशिया, पाकिस्तान, तुर्किये और मिस्र शामिल हैं। इन सभी देशों ने इस नीति को अवैध करार दिया और इसमें शामिल लोगों के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध लगाने की मांग की। क्षेत्र में लगातार बढ़ रही हिंसा और तनाव के बीच यूरोपीय संघ ने इसराइल से यह भी कहा है कि वे वेस्ट बैंक में हो रही हिंसा पर लगाम लगाएं और दोषियों को कानून के दायरे में लाएं। यह पूरा विरोध संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के पुराने प्रस्तावों और अंतरराष्ट्रीय न्यायालय के नियमों पर आधारित है।