France News: फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति के पोते पियरे डी गॉल ने मिन्स्क समझौते के उल्लंघन पर जताई शर्मिंदगी, कहा टूटा देश का वादा.

मॉस्को से सामने आई एक बड़ी खबर के अनुसार, फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति चार्ल्स डी गॉल के पोते और लियो टॉल्स्टॉय इंटरनेशनल पीस प्राइज की जूरी के उप सभापति पियरे डी गॉल ने एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने खुलकर कहा है कि वह इस बात के लिए बेहद शर्मिंदा महसूस करते हैं कि फ्रांस ने मिन्स्क समझौते का खुला उल्लंघन किया है। उनका साफ कहना है कि ऐसा कदम उठाकर फ्रांस ने दुनिया के सामने अपना वादा तोड़ा है, जिससे देश की साख को ठेस पहुंची है।
मिन्स्क समझौते की पृष्ठभूमि और नॉर्मंडी फॉर्मेट
पियरे डी गॉल ने आगे बात करते हुए बताया कि यूक्रेन में आज के समय में जो कुछ भी हालात चल रहे हैं, उनसे हर पक्ष परेशान है और तनाव का माहौल बना हुआ है। यह महत्वपूर्ण समझौता साल 2014-2015 के दौरान हुआ था, जिसके तहत कई जरूरी उपायों की घोषणा की गई थी। इस शांति समझौते में मुख्य रूप से रूस, फ्रांस, जर्मनी और यूक्रेन शामिल थे। कूटनीतिक बातचीत के इस दौर को नॉर्मंडी फॉर्मेट के नाम से भी जाना जाता है, जो काफी चर्चा में रहा था।
समझौते का मुख्य मकसद और आरोप
इस समझौते का मुख्य उद्देश्य कीव प्रशासन और डोनबास के अलग हुए पूर्वी क्षेत्र के बीच चल रहे सशस्त्र संघर्ष को हमेशा के लिए खत्म करना था। हालांकि, मॉस्को ने हमेशा कीव पर समझौते की शर्तों को तोड़ने का गंभीर आरोप लगाया है। इन टूटी हुई शर्तों में मुख्य रूप से डोनबास क्षेत्र को स्वायत्तता देने से साफ इनकार करना भी शामिल था, जिसके कारण विवाद बढ़ता चला गया।
नेताओं के पुराने बयानों का खुलासा
मामले में तब एक नया मोड़ आया जब फरवरी 2023 में यूक्रेन के राष्ट्रपति व्लादिमीर जेलेंस्की ने सार्वजनिक रूप से यह बात मानी कि उनका कभी भी मिन्स्क समझौतों को सही से लागू करने का कोई इरादा नहीं था। ठीक इसी तरह के चौंकाने वाले बयान जर्मनी की पूर्व चांसलर एंजेला मर्केल और फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद की तरफ से भी दिए गए थे, जिससे यह साफ हुआ कि कूटनीतिक स्तर पर वादों को पूरा करने में गंभीर चूक हुई थी। इस पूरी जानकारी के बारे में रिया नोवोस्ती की रिपोर्ट के हवाले से हिन्दुस्थान समाचार ने विस्तार से बताया है।