फ्रांस और ब्रिटेन समेत कई देशों का इसराइल पर कड़ा प्रहार, वेस्ट बैंक सेटलमेंट प्रोजेक्ट का किया विरोध.

Aanya20 August 20263 min read83 viewsWorld
फ्रांस और ब्रिटेन समेत कई देशों का इसराइल पर कड़ा प्रहार, वेस्ट बैंक सेटलमेंट प्रोजेक्ट का किया विरोध.

अंतरराष्ट्रीय राजनीति में इस वक्त एक बड़ी खबर सामने आ रही है जहाँ वेस्ट बैंक में इसराइली प्रोजेक्ट को लेकर दुनिया के कई बड़े देश आमने-सामने आ गए हैं। 20 अगस्त 2026 को फ्रांस, जर्मनी, इटली और यूनाइटेड किंगडम ने मिलकर एक साझा बयान जारी किया जिसमें इसराइल के उस फैसले की कड़ी निंदा की गई जिसके तहत वेस्ट बैंक के ई-वन इलाके में निर्माण कार्य के लिए बोलियां आमंत्रित की गई हैं। इन यूरोपीय देशों ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि इस कदम से फिलिस्तीनी इलाकों का भौगोलिक ढांचा बिगड़ जाएगा और भविष्य में टू-स्टेट सॉल्यूशन की उम्मीदों को बड़ा झटका लगेगा। इस पूरी घटना की विस्तृत जानकारी आप ReliefWeb Report पर देख सकते हैं।

वेस्ट बैंक में हाउसिंग यूनिट्स और अंतरराष्ट्रीय विरोध

इसराइली सरकार ने 18 अगस्त 2026 को ई-वन क्षेत्र में 1,234 हाउसिंग यूनिट्स के लिए टेंडर खोले थे। इस प्रोजेक्ट को अगस्त 2025 में सिविल प्रशासन की उच्च योजना समिति से शुरुआती मंजूरी मिल चुकी थी जिसके बाद अब इसे आगे बढ़ाया जा रहा है। इस फैसले के सामने आते ही दुनियाभर से तीखी प्रतिक्रियाएं आनी शुरू हो गई हैं। ब्रिटेन के विदेश सचिव Ed Miliband ने इस टेंडर को पूरी तरह से अस्वीकार्य और विध्वंसक करार दिया है। उन्होंने कहा कि इससे वेस्ट बैंक का इलाका पूर्वी येरुशलम से कट सकता है। इसी तीखे विरोध के चलते ब्रिटेन ने इसराइल के चार्ज डी अफेयर्स को तलब कर अपनी कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है और इसराइली नीतियों के खिलाफ संभावित प्रतिबंधों समेत कई उपायों पर विचार किया जा रहा है। इस संबंध में आधिकारिक घोषणा UK Government News पर पढ़ी जा सकती है।

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इसराइल का जवाब और कानूनी लड़ाई

ब्रिटेन और अन्य देशों के विरोध पर इसराइली विदेश मंत्री Gideon Sa'ar ने कड़ा रुख अपनाते हुए ब्रिटेन के इस रुख को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि यहूदी जनता को अपनी पूरी भूमि पर रहने का पूरा अधिकार है। वहीं दूसरी ओर इसराइल के राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री Itamar Ben-Gvir ने ब्रिटिश बयान को उपदेशात्मक और गैर-जरूरी बताया। मिस्र और तुर्की के विदेश मंत्रियों ने भी चेतावनी दी है कि इस प्रोजेक्ट की वजह से पूर्वी येरुशलम अपने फिलिस्तीनी परिवेश से पूरी तरह कट जाएगा। मानवाधिकार संगठन ह्यूमन राइट्स वॉच ने भी कंपनियों को चेतावनी दी है कि यदि वे इस बोली में हिस्सा लेती हैं तो वे मानवाधिकारों के हनन और युद्ध अपराधों में भागीदार बन सकती हैं।

अदालत का दरवाजा और यूएन की चेतावनी

स्थानीय स्तर पर भी इस फैसले के खिलाफ आवाज उठाई जा रही है। 20 अगस्त 2026 को इसराइली सेटलमेंट वॉचडॉग पीस नाउ के साथ-साथ अधिकार समूहों Ir Amim और Bimkom ने येरुशलम डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में एक याचिका दायर कर इस टेंडर पर तुरंत रोक लगाने की मांग की है। इसी दिन संयुक्त राष्ट्र प्रमुख ने भी इस अंतरराष्ट्रीय विरोध में अपनी आवाज जोड़ी और इसराइल से ई-वन विस्तार से जुड़े सभी कदमों को तुरंत रोकने का आग्रह किया। यूरोपीय संघ भी इस मामले पर गंभीर नजर बनाए हुए है और यदि निर्माण कार्य आगे बढ़ता है तो प्रॉडक्ट लेबलिंग और कूटनीतिक सहयोग को कम करने जैसे व्यापक प्रतिबंधों पर विचार किया जा रहा है।

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