फ्रांस और ब्रिटेन के 100 से ज्यादा पूर्व राजनयिकों ने फिलिस्तीनी क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय कानून लागू करने की मांग की

Sushma Kumari22 August 20263 min read72 viewsWorld
फ्रांस और ब्रिटेन के 100 से ज्यादा पूर्व राजनयिकों ने फिलिस्तीनी क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय कानून लागू करने की मांग की

अंतरराष्ट्रीय राजनीति में एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है, जहां फ्रांस और ब्रिटेन के 100 से अधिक पूर्व राजनयिकों ने मिलकर अपनी सरकारों से फिलिस्तीनी क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय कानून को सख्ती से लागू करने की अपील की है। 22 अगस्त 2026 को फ्रांस के प्रतिष्ठित अखबार Le Monde और ब्रिटेन के The Guardian में एक संयुक्त पत्र प्रकाशित किया गया, जिसमें सरकारों से मिलकर काम करने को कहा गया। पत्र पर हस्ताक्षर करने वालों में ब्रिटेन के पूर्व संयुक्त राष्ट्र (UN) राजदूत Jeremy Greenstock और Emyr Jones Parry के अलावा फ्रांस के विदेश मंत्रालय के मध्य पूर्व मामलों के पूर्व निदेशक Yves Aubin de la Messuziere तथा Denis Bauchard भी शामिल हैं। इन सभी दिग्गजों ने चेतावनी देते हुए कहा कि फिलिस्तीन हमारी आंखों के सामने से गायब हो रहा है और सरकारों को तुरंत ठोस कदम उठाने चाहिए।

इजरायल पर लगाए गए गंभीर आरोप

इस संयुक्त पत्र में इजरायल की नीतियों की कड़ी आलोचना की गई है और आरोप लगाया गया है कि इजरायल गाजा और वहां की आबादी को मिटाने की एक सोची-समझी नीति पर काम कर रहा है। पूर्व अधिकारियों ने 7 अक्टूबर 2023 को हमास द्वारा किए गए हमलों की निंदा की, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि किसी भी स्थिति में इजरायल के मौजूदा कदमों को सही नहीं ठहराया जा सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि इजरायल अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (ICJ) के फैसलों और कानून की लगातार अवहेलना कर रहा है। इन पूर्व राजनयिकों ने मांग की है कि अंतरराष्ट्रीय अदालतों के फैसलों को जमीन पर उतारने के लिए दोनों देशों की सरकारों को इजरायल के साथ व्यापारिक समझौते और सैन्य सहयोग को निलंबित कर देना चाहिए। इसके अलावा, उन्होंने हथियार बेचने पर भी प्रतिबंध लगाने की बात कही ताकि इजरायल पर दबाव बनाया जा सके।

GulfHindi की हर खबर सबसे पहलेJoin

फिलिस्तीनी राज्य और राजनीतिक भविष्य पर जोर

पत्र में सिर्फ इजरायल पर दबाव बनाने की बात नहीं कही गई है, बल्कि फिलिस्तीनियों के लिए भी एक स्पष्ट रोडमैप का जिक्र किया गया है। राजनयिकों ने फिलिस्तीनी नेताओं से अपील की है कि वे गाजा और वेस्ट बैंक का राजनीतिक और आर्थिक रूप से पुनर्मिलन करें ताकि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों के जरिए एक लोकतांत्रिक राज्य की स्थापना की जा सके। यह पूरा घटनाक्रम साल 2026 के दौरान हुए कई बड़े क्षेत्रीय बदलावों के बाद सामने आया है। इससे पहले 24 जुलाई 2026 को इजरायली संसद ने जुडैया, सामरिया और जॉर्डन घाटी पर इजरायली संप्रभुता लागू करने के पक्ष में मतदान किया था। इसके बाद 20 अगस्त 2026 को फ्रांस, ब्रिटेन और नौ अन्य देशों ने मिलकर इजरायल द्वारा E1 सेटलमेंट प्रोजेक्ट के तहत निर्माण टेंडर जारी करने की खुलकर आलोचना की थी।

कूटनीतिक मोर्चे पर बढ़ती हलचल

फ्रांसीसी विदेश मंत्री Jean-Noel Barrot ने 21 अगस्त 2026 को फिलिस्तीनी आत्मनिर्णय के प्रति फ्रांस की प्रतिबद्धता को फिर से दोहराया और 14 अन्य देशों के साथ मिलकर फिलिस्तीनी राज्य को मान्यता देने की सामूहिक अपील की। आपको बता दें कि फ्रांस और ब्रिटेन दोनों ने पहले ही साल 2025 में फिलिस्तीनी राज्य को औपचारिक मान्यता दे दी थी। हालांकि, इन सभी diplomatic बदलावों पर इजरायल की तरफ से तीखी प्रतिक्रिया आई है। इजरायली विदेश मंत्री Gideon Sa'ar ने फ्रांस द्वारा फिलिस्तीनी राज्य को मान्यता दिए जाने के फैसले की कड़ी आलोचना करते हुए इसे आतंक का इनाम और हमास को बढ़ावा देने वाला कदम बताया है। दूसरी तरफ, अमेरिका अभी भी एकतरफा मान्यता के खिलाफ खड़ा है और उसका मानना है कि इस तरह के कदमों से संघर्ष को सुलझाने में बाधा आती है और बंधકો की रिहाई के प्रयास भी प्रभावित होते हैं। साथ ही अमेरिका ने संयुक्त राष्ट्र समर्थित होने वाले आगामी सम्मेलन में भाग लेने से भी दूरी बनाए रखी है।

Share:

Comments

Leave a comment