गाज़ा के बच्चों के लिए खास तैराकी प्रोग्राम, युद्ध में अंग गंवाने वाले बच्चों का बढ़ाया जा रहा हौसला.

गाज़ा के खान यूनिस इलाके में इजराइल-हमास युद्ध के दौरान अपने अंग गंवाने वाले बच्चों के लिए एक विशेष तैराकी कार्यक्रम शुरू किया गया है। इस अनोखी पहल का मुख्य उद्देश्य बच्चों का खोया हुआ आत्मविश्वास वापस लाना और उनकी गतिशीलता को फिर से बेहतर करना है। यह कार्यक्रम इस साल 26 जुलाई के बाद शुरू हुआ है, जिसे नॉन-प्रॉफिट संगठन हील फिलिस्तीन ने अमजेद तांतिश और तांतिश स्विमिंग अकादमी गाज़ा के साथ मिलकर शुरू किया है। इस समय इस प्रोग्राम में लगभग 90 ऐसे बच्चे हिस्सा ले रहे हैं जिनके अंग कट चुके हैं या जो अनाथ हो चुके हैं। इन बच्चों के लिए हफ्ते में दो1 बार ट्रेनिंग सेशन रखे जाते हैं, और आयोजकों की योजना इसे अक्टूबर तक और फंडिंग मिलने पर सर्दियों तक जारी रखने की है।
गाज़ा में बाल amputees की सबसे बड़ी संख्या
मौजूदा समय में गाज़ा में प्रति व्यक्ति के हिसाब से दुनिया भर में बच्चों के हाथ-पैर कटने के मामले सबसे ज्यादा दर्ज किए जा रहे हैं। इंटरनेशनल रेस्क्यू कमेटी (IRC) के आंकड़ों के मुताबिक, जब से यह युद्ध शुरू हुआ है तब से लेकर सितंबर 2025 तक इस इलाके में अनुमानित 4,000 लोगों के अंग काटे जा चुके हैं। इसके अलावा, वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (WHO) की 2025 की रिपोर्ट बताती है कि लगभग 42,000 लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं, जिनमें से एक चौथाई बच्चे शामिल हैं। सितंबर 2024 से मई 2026 के बीच लगभग 2,300 ऐसे लोगों की जांच की गई, लेकिन इनमें से सिर्फ 500 लोगों को ही पक्के कृत्रिम अंग यानी प्रोस्थेसिस मिल सके। ह्यूमैनिटी एंड इन्क्लूजन यूके की एक रिपोर्ट के अनुसार, युद्ध के सबसे भीषण दौर में हर दिन करीब 10 बच्चों के पैर काटे जा रहे थे।
बच्चों को सामान्य बचपन देने की कोशिश
हील फिलिस्तीन के प्रमुख स्टीव सोसेबी ने बताया कि इस प्रोग्राम का मकसद बच्चों को दोबारा से अपना बचपन जीने का मौका देना है। इससे बच्चों को युद्ध के दौरान मिले मानसिक और शारीरिक आघात से उबरने में बहुत मदद मिलती है। हालांकि इस नेक काम को चलाने में कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। बुनियादी ढांचे की कमी और लॉजिस्टिक्स से जुड़ी समस्याएं लगातार बनी हुई हैं। इंटरनेशनल कमेटी ऑफ द रेड क्रॉस (ICRC) के पैट्रिक ग्रिफिथ्स ने जानकारी दी कि वहां मेडिकल स्टाफ की बहुत कमी है और हजारों मरीजों के लिए केवल 9 प्रोस्थेटिक और ऑर्थोटिक एक्सपर्ट ही मौजूद हैं। इसके अलावा, उत्तरी गाज़ा से बच्चों को लाने में ईंधन की कमी बड़ी बाधा बन रही है, साथ ही पूल को ठीक रखने का सामान और रिहैबिलिटेशन का सामान भी बहुत मुश्किल से मिल रहा है।