गाज़ा में शमशानों की कमी से गहराया संकट, मलबे के नीचे दबे हैं हजारों शव

गाज़ा में जारी युद्ध के बीच मृतकों को दफनाने को लेकर एक बहुत बड़ा संकट खड़ा हो गया है क्योंकि इलाके के ज्यादातर कब्रिस्तान नष्ट हो चुके हैं। 22 अगस्त 2026 तक इस युद्ध में मरने वालों की कुल संख्या 73,419 तक पहुंच गई है और 1,74,364 लोग घायल हुए हैं। गाज़ा स्वास्थ्य मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार, 20 अगस्त 2026 को खत्म हुए 24 घंटों में कम से कम 10 फिलिस्तानी मारे गए और 25 घायल हुए।
कब्रिस्तानों में जगह की भारी कमी
गाज़ा एनजीओ नेटवर्क के निदेशक मोहम्मद सल्हास के अनुसार, गाज़ा के 93% से ज्यादा कब्रिस्तानों को नुकसान पहुंचा है या उन्हें खोदा जा चुका है। गाज़ा सिटी में कब्रिस्तान के मजदूरों को शवों की भारी भीड़ को संभालने के लिए कब्रों को तीन परतों तक गहरा या एक के ऊपर एक बनाना पड़ रहा है। कुछ दिनों में एक दिन के भीतर 300 शवों को दफनाने की स्थिति भी आई है।
मलबे के नीचे दबे हजारों शव
अंदाजा लगाया जा रहा है कि हजारों पीड़ित इमारतों के मलबे के नीचे दबे हुए हैं। फिलिस्तीनी सिविल डिफेंस के प्रवक्ता महमूद बासल ने 12 अगस्त 2026 को चेतावनी दी थी कि मलबे के नीचे 8,000 से अधिक शव दबे होने की आशंका है। भारी मशीनरी, ईंधन और सुरक्षा उपकरणों की कमी के कारण शवों को बाहर निकालने का काम बहुत धीमी गति से चल रहा है।
अंतरराष्ट्रीय राहत और रुकावटें
संयुक्त राष्ट्र (UN) के प्रवक्ता स्टेफन दुजारिक ने 20 अगस्त 2026 को पुष्टि की कि मलबे से निकाले जाने के बाद 50 लोगों को दफनाया गया, जिनमें 19 ऐसे बच्चे शामिल थे जो दो साल पहले मारे गए थे। दुजारिक ने बताया कि इस काम में इसलिए रुकावट आ रही है क्योंकि इजरायली प्रशासन स्पेयर पार्ट्स, लुब्रिकेंट और जरूरी उपकरणों के आने पर रोक लगा रहा है। अगस्त की शुरुआत में 112 फिलिस्तीनियों के लिए एक सामूहिक जनाज़ा निकाला गया था, जिनके शव सालों से मलबे में फंसे हुए थे।
बासल ने कहा कि अगर पर्याप्त संसाधन मिल जाएं तो यह काम महीनों में पूरा हो सकता है, वरना संसाधनों के अभाव में इसमें कई साल लग सकते हैं। सिविल डिफेंस के कर्मचारियों को अक्सर बहुत कम सुरक्षा के साथ या अपने नंगे हाथों से ही इंसानी अवशेषों को संभालना पड़ता है। इसके अलावा, मानवाधिकार समूहों ने चिंता जताई है कि इजरायली बलों द्वारा बड़े पैमाने पर मलबा हटाने से उन सबूतों को नुकसान पहुंच सकता है जो पीड़ितों की पहचान और जवाबदेही के लिए बहुत जरूरी हैं।