गाजा में गैस खत्म, लोगों को मजबूरी में कचरे के ढेर से जलाना पड़ रहा है प्लास्टिक और लकड़ी

गाजा पट्टी के अंदर हालात इतने खराब हो चुके हैं कि आम लोगों को जिंदा रहने के लिए कचरे के ढेरों से कबाड़ बीनना पड़ रहा है। 22 अगस्त 2026 तक की स्थिति के अनुसार, दीर अल-बलाह और आसपास के इलाकों में रहने वाले फिलिस्तीनी नागरिक खाना पकाने के लिए गैस न मिलने के कारण अब कचरे के डिब्बों में जलने वाली चीजें तलाश रहे हैं। यह गंभीर संकट लंबे समय से जारी पाबंदियों और खाना पकाने वाली गैस की भारी कमी के कारण पैदा हुआ है, जिससे आम जनता का जीवन नर्क बन गया है।
संयुक्त राष्ट्र और राहत संगठनों की डरावनी रिपोर्ट
संयुक्त राष्ट्र के मानवीय मामलों के समन्वय कार्यालय (OCHA) के अधिकारियों ने इस बात की पुष्टि की है कि गाजा में लगभग 94 प्रतिशत परिवारों को इस समय बुनियादी चीजों की सख्त जरूरत है, जिसमें ईंधन और ऊर्जा सबसे ऊपर हैं। संयुक्त राष्ट्र की इस रिपोर्ट के बारे में अधिक जानकारी आप ReliefWeb Report पर जाकर देख सकते हैं। विश्व खाद्य कार्यक्रम के आंकड़ों का हवाला देते हुए OCHA ने बताया कि जुलाई 2026 के अंत तक सर्वे में शामिल लगभग 73 प्रतिशत परिवार गैस की कमी की वजह से कचरा और प्लास्टिक जलाने को मजबूर हो चुके थे। संयुक्त राष्ट्र महासचिव के प्रवक्ता स्टेफन दुजार्रिक ने बताया कि शेल्टर कैंपों में रहने वाले पांच में से चार परिवार भयंकर भूखमरी का सामना कर रहे हैं, क्योंकि वहां भोजन पकाने के लिए ऊर्जा या ईंधन का नामोनिशान नहीं बचा है।
स्वास्थ्य पर मंडरा रहा है गंभीर खतरा
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि प्लास्टिक, कचरा या पेंट किए हुए लकड़ी के टुकड़ों को जलाने से जो जहरीला धुआं निकलता है, वह सांस की गंभीर बीमारियों का कारण बन रहा है। इस जहरीले धुएं से सबसे ज्यादा खतरा बुजुर्गों और छोटे बच्चों को है। इसके अलावा, कचरे के ढेरों से कबाड़ या ईंधन ढूंढने वाले लोगों को चोट लगने और खतरनाक बीमारियों की चपेट में आने का खतरा भी लगातार बना हुआ है।
जमीनी हकीकत और सैन्य कार्रवाई
दूसरी तरफ, गाजा में सैन्य संघर्ष अभी भी थमा नहीं है। मध्य गाजा में 22 अगस्त 2026 को हुए एक सैन्य हमले में एक फिलिस्तीनी की मौत हो गई और दूसरा घायल हो गया, जिसकी पुष्टि अल-अक्सा शहादा अस्पताल के स्वास्थ्य अधिकारियों ने की। स्थानीय निवासी आदम कलहूत जैसे लोगों का कहना है कि वे कूटनीतिक वार्ताओं और तथाकथित समझौतों पर अब भरोसा नहीं करते, क्योंकि ये बातें जमीन पर उतरने के बजाय केवल मीडिया की खबरों तक ही सीमित रहती हैं। नॉर्वेजियन शरणार्थी परिषद के अनुसार, घरों की मरम्मत और रोजमर्रा की जिंदगी चलाने के लिए जरूरी सामान भी पर्याप्त मात्रा में गाजा के अंदर नहीं पहुंच पा रहा है, जिससे आम जनता की मुसीबतें दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही हैं।