Gaza: गाजा की विस्थापित लड़कियों के लिए उम्मीद की किरण, हर हफ्ते लगती है खास सिनेमा क्लास.

गाजा के मुश्किल हालातों के बीच बच्चों की जिंदगी को थोड़ा आसान बनाने के लिए एक अनोखी पहल शुरू की गई है, जहां विस्थापित लड़कियां हर हफ्ते लगने वाली मेकशिफ्ट सिनेमा क्लास के जरिए सुकून के पल तलाश रही हैं। 14 साल की नताली अल-हाटूम, जो मूल रूप से गाजा सिटी के रेमाल इलाके की रहने वाली हैं, इस छोटे से प्रयास के जरिए चल रहे संघर्ष से कुछ समय के लिए राहत पा रही हैं। अपने परिवार का घर बमबारी में गंवाने के बाद वह केंद्रीय गाजा के एक किराए के कमरे में रहने को मजबूर हैं और इस युद्ध में उन्होंने अपने दादा, दादी और एक चचेरे भाई को भी खो दिया है।
देव अल-बलाह में एक चैरिटी की तरफ से इस कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है और UOSSM USA यानी यूनियन ऑफ मेडिकल केयर एंड रिलीफ ऑर्गेनाइजेशन-USA इसका समर्थन करता है। यह पहल 11 से 16 साल की उम्र की विस्थापित लड़कियों के लिए एक सुरक्षित जगह मुहैया कराती है। इस सिनेमा सेटअप में पारंपरिक प्रोजेक्टर की जगह टेलीविजन स्क्रीन और प्लास्टिक की कुर्सियों का इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन असली सिनेमा जैसा अहसास कराने के लिए आयोजकों की तरफ से नकली टिकट और पॉपकॉर्न की व्यवस्था भी की जाती है।
मनोवैज्ञानिक मदद और खेलकूद की गतिविधियां
इस प्रोग्राम में सिर्फ फिल्में ही नहीं दिखाई जाती हैं, बल्कि इसमें खेल और पढ़ाई-लिखाई से जुड़ी गतिविधियां भी शामिल होती हैं। शुरुआत में इस कार्यक्रम में 15 से 20 लड़कियां आती थीं, लेकिन अब हर हफ्ते आने वाली प्रतिभागियों की संख्या बढ़कर 35 से 40 हो गई है। मनोवैज्ञानिक सुविधाप्रदाता जेहान अबू जानौना इन सेशन को संभालती हैं और उनका कहना है कि यह सिनेमा traumatized बच्चों को मानसिक रूप से मजबूत करने की एक बड़ी कोशिश का हिस्सा है, जिसमें उन्हें भावनाओं पर काबू पाने, अपनी सुरक्षा और व्यक्तिगत सीमाओं के बारे में सिखाया जाता है।
तनाव से दूर एक अलग दुनिया
इस कार्यक्रम में हिस्सा लेने वाली 15 साल की रामा अबू मोहम्मद इस सेंटर को एक अलग ही दुनिया मानती हैं, जहां वे अपने आसपास के खतरों और डर को कुछ समय के लिए भूल जाती हैं। नताली अल-हाटूम का कहना है कि हर गुरुवार को होने वाली इन स्क्रीनिंग में शामिल होने से उन्हें ऐसा लगता है कि वे किसी युद्ध में नहीं जी रही हैं और इन मुश्किल दिनों से राहत पाकर उन्हें अपने भीतर फिर से ऊर्जा महसूस होती है, जिससे वे संघर्ष के भावनात्मक बोझ को थोड़ा कम कर पाती हैं। अक्टूबर 2023 में जब से यह युद्ध शुरू हुआ है, तब से लेकर अब तक इस संघर्ष में 73,000 से ज्यादा फिलिस्तीनी लोगों की मौत हो चुकी है।