गाज़ा अस्पताल हमले को हुआ एक साल पूरा, खान युस में जुटे लोग, अब तक नहीं मिला न्याय.

Aanya25 August 20263 min read50 viewsWorld
गाज़ा अस्पताल हमले को हुआ एक साल पूरा, खान युस में जुटे लोग, अब तक नहीं मिला न्याय.

गाज़ा के नासिर अस्पताल पर हुए घातक इजरायली सैन्य हमले की बरसी पर लोग बड़ी संख्या में इकट्ठा हुए। इस दर्दनाक घटना को बीते हुए पूरा एक साल हो चुका है लेकिन पीड़ितों के परिवारों और दुनिया भर के लोगों के मन में वह खौफनाक मंजर आज भी ताजा है। इस हमले में कुल 22 फलस्तीनी नागरिकों की जान चली गई थी, जिसमें कई जाने-माने पत्रकार और राहतकर्मी भी शामिल थे।

पत्रकारों और राहतकर्मियों की हुई थी मौत

गत 25 अगस्त 2025 को खान युस स्थित नासिर अस्पताल को निशाना बनाया गया था। यह एक डबल-टैप हमला था, जिसमें पहली स्ट्राइक के बाद राहत कार्य में जुटे लोगों को भी निशाना बनाया गया। इस भयानक हादसे में विजुअल पत्रकार मरियम दग्गा, रॉयटर्स के कैमरामैन हुसाम अल-मासरी, फ्रीलांस पत्रकार मोआएज अबू ताहा, अल जज़ीरा के कैमरामैन मोहम्मद सालामा और मिडिल ईस्ट आई तथा कुड्स न्यूज नेटवर्क के संवाददाता अहमद अबू अजीज की मौत हो गई थी। इनके अलावा कई बचावकर्मी भी अपनी जान गंवा बैठे थे। इस पूरी घटना ने पूरी दुनिया के मीडिया जगत को हिलाकर रख दिया था।

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जवाबदेही और अंतरराष्ट्रीय मांग

घटना को एक साल बीत जाने के बाद भी किसी भी जिम्मेदार व्यक्ति को सजा नहीं मिली है और न ही किसी को जवाबदेह ठहराया गया है। हाल ही में 25 अगस्त 2026 को एपी की कार्यकारी संपादक जूली पेस और रॉयटर्स की प्रधान संपादक एलेसेंड्रा गैलोनी ने एक संयुक्त बयान जारी किया। उन्होंने इजरायली सरकार से इस मामले में पूरी स्पष्टता और जवाबदेही की मांग की है। उनका कहना है कि अभी तक जो भी जानकारी सामने आई है, वह पूरी तरह से अपर्याप्त है।

इजरायली सेना के भीतर से आया बड़ा बयान

इस पूरे विवाद के बीच एक इजरायली सैनिक ने नाम न छापने की शर्त पर अंदरूनी चर्चाओं का खुलासा किया। सैनिक ने बताया कि सेना को अपनी जांच में ऐसा कोई सबूत नहीं मिला जिससे यह साबित हो सके कि अस्पताल की छत पर लगा कैमरा, जिसे हमले का मुख्य निशाना बताया गया था, हमास से जुड़ा हुआ था। यह बयान इजरायल के उस शुरुआती दावे के बिल्कुल विपरीत है जिसमें कहा गया था कि वह कैमरा हमास द्वारा संचालित था और मारे गए लोगों में से छह लोग लड़ाके थे।

जांच और मानवाधिकार संगठनों की प्रतिक्रिया

इजरायली सेना का कहना है कि यह मामला अभी भी विचाराधीन है और निष्कर्षों को मिलिट्री एडवोकेट जनरल कॉर्प्स को भेजा जाएगा ताकि यह तय किया जा सके कि आपराधिक जांच की जरूरत है या नहीं। हालांकि, इसके लिए कोई भी समय सीमा तय नहीं की गई है। ब्रेकिंग द साइलेंस जैसे मानवाधिकार संगठनों का लंबे समय से यह मानना रहा है कि फलस्तीनियों की मौत के मामलों में इजरायली जांच बेहद धीमी होती है और शायद ही कभी किसी को सजा मिलती है। इस तरह के हमलों ने जिनेवा सम्मेलनों के तहत युद्ध अपराधों की संभावना पर भी गंभीर अंतरराष्ट्रीय चिंताएं बढ़ा दी हैं।

हमले के तुरंत बाद संयुक्त राष्ट्र में फलस्तीनी राजदूत ने इसे पत्रकारों और चिकित्सकों पर एक सुनियोजित हमला करार दिया था। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने भी पहले एक निष्पक्ष जांच की मांग की थी। इसके अलावा विश्व स्वास्थ्य संगठन के प्रमुख ने भी युद्धविराम की अपनी मांग को फिर से दोहराया है। पीड़ित परिवार आज भी अपनों को याद करके गमगीन हैं और न्याय का इंतजार कर रहे हैं।

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