Gaza Medical Crisis: गाज़ा में 3.5 लाख मरीजों को दवाइयों की भारी कमी, स्वास्थ्य व्यवस्था पर मंडराया बड़ा खतरा।

गाज़ा पट्टी से एक बेहद चिंताजनक खबर सामने आई है जहाँ स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी ने 22 अगस्त 2026 को यह जानकारी दी कि इलाके में 3.5 लाख से ज्यादा मरीजों को तुरंत दवाइयों की सख्त जरूरत है। हालात इतने खराब हो चुके हैं कि गाज़ा में जितनी मेडिकल सप्लाई पहुंच रही है, वह वहां की गंभीर जरूरतों को पूरा करने के लिए काफी कम साबित हो रही है। वहां की पूरी स्वास्थ्य व्यवस्था लगभग चरमरा चुकी है और अस्पतालों का बुनियादी ढांचा तबाह हो गया है। लोग बार-बार अपना घर छोड़ने को मजबूर हैं और अस्पतालों में ईंधन, मेडिकल स्टाफ और जरूरी दवाओं की भारी कमी बनी हुई है।
गाज़ा में दवाओं और मेडिकल सप्लाई का भारी संकट
राहत और बचाव कार्यों से जुड़े आंकड़ों के अनुसार, मौजूदा समय में जरूरी मेडिकल सप्लाई का 40 प्रतिशत से अधिक हिस्सा पूरी तरह खत्म हो चुका है। ऐसा अनुमान लगाया जा रहा है कि आने वाले दो महीनों के भीतर बाकी बची दवाइयां भी पूरी तरह समाप्त हो जाएंगी। हालात यह हैं कि डायबिटीज के इलाज में काम आने वाली इंसुलिन का 65 प्रतिशत और खून की कुल जरूरत का 50 प्रतिशत हिस्सा इस समय बिल्कुल उपलब्ध नहीं है। गाज़ा के स्वास्थ्य मंत्रालय ने पहले ही चेतावनी दी थी कि कैंसर और खून की बीमारियों से जुड़ी 61 प्रतिशत दवाइयां खत्म हो चुकी हैं, जबकि कुल मेडिकल किल्लत का आंकड़ा 47 प्रतिशत तक पहुंच गया है।
अंतरराष्ट्रीय मदद और सहायता पर कसे कड़े शिकंजे
इस गंभीर स्वास्थ्य संकट से निपटने के तमाम प्रयासों के सामने बड़ी रुकावटें आ रही हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी WHO ने 15 अगस्त 2026 को दुबई से लगभग 150 टन मेडिकल सप्लाई मिस्र पहुंचाई थी ताकि करीब 5 लाख मरीजों की मदद की जा सके। लेकिन इसके बावजूद, अमेरिकी ट्रेजरी ने फिलिस्तीनी इलाकों में जाने वाली अंतरराष्ट्रीय मदद, एनजीओ के जरिए होने वाले पैसों के ट्रांसफर और बैंकिंग चैनलों पर कड़े प्रतिबंध लगा दिए हैं। इन पाबंदियों की वजह से बुनियादी जरूरतों के लिए आने वाला फंड पूरी तरह रुक गया है।
इसके अलावा, इजरायली अधिकारियों ने जनरेटर, एंबुलेंस और पानी के पंप चलाने के लिए जरूरी इंजन ऑयल और स्पेयर पार्ट्स को गाज़ा में लाने पर रोक लगा रखी है। इस मुश्किल समय की पूरी जानकारी आप ReliefWeb Report पर जाकर देख सकते हैं। गाज़ा के अस्पतालों और आम लोगों के सामने आ रही इन परेशानियों की वजह से वहां की जिंदगी बेहद दयनीय होती जा रही है और हर दिन मरीजों की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं।