गाज़ा में ईंधन संकट और रुका हुआ संघर्ष विराम, नगर पालिका ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से लगाई मदद की गुहार.

गाज़ा पट्टी के नगर पालिकाओं के संघ ने 18 अगस्त 2026 को अंतरराष्ट्रीय समुदाय और संघर्ष विराम मध्यस्थों से एक बड़ी अपील की है। इस अपील में कहा गया है कि इस्राइल पर दबाव बनाया जाए ताकि वह मौजूदा संघर्ष विराम समझौते का पालन करे और क्षेत्र में तुरंत ईंधन की आपूर्ति शुरू हो सके। नगर निकाय संघ ने बताया कि संघर्ष विराम की घोषणा के 305 दिन बीत जाने के बाद अब गाज़ा में नगरपालिका का कामकाज पूरी तरह से ठप होने की कगार पर पहुंच गया है। आंकड़ों के मुताबिक, गाज़ा के कुल 700 जनरेटरों में से केवल 40 जनरेटरों को ही ईंधन मिल पाया है, जिसके कारण पानी के कुएं, पंपिंग स्टेशन और सीवेज की सुविधाएं बहुत बुरी तरह से प्रभावित हुई हैं।
स्वास्थ्य और स्वच्छता को लेकर बड़ा खतरा
संयुक्त राष्ट्र ने 18 अगस्त को अपनी रिपोर्ट में बताया कि गाज़ा के ज्यादातर फिलिस्तीनी अब खुले सीवेज या इंसानी कचरे के पास रहने को मजबूर हैं। कचरा और मलबा सड़कों पर फैल रहा है, जिससे वहां बीमारियों के तेजी से फैलने का खतरा बहुत ज्यादा बढ़ गया है। गाज़ा पट्टी में मेडिकल रिलीफ के डायरेक्टर डॉ. मोहम्मद अबू अफश ने 17 अगस्त को चेतावनी दी थी कि ईंधन की भारी कमी के कारण कई राहत केंद्र अगले 24 घंटे के भीतर पूरी तरह से बंद होने की स्थिति में आ गए हैं। इस गंभीर मानवीय संकट के बीच राजनीतिक बातचीत भी लगातार रुकी हुई है।
राजनीतिक वार्ता और समझौते की स्थिति
17 और 18 अगस्त के बीच, अमेरिकी दूत जेरेड कुशनर और प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने येरुशलम में अपनी बैठक खत्म की, लेकिन इस्राइल की तरफ से नवीनतम संघर्ष विराम प्रस्ताव पर कोई पक्का वादा नहीं किया गया। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू अपनी इस बात पर अड़े हुए हैं कि जब तक हमास को पूरी तरह से हथियार नहीं डाले जाते, तब तक इस्राइली सेना पीछे नहीं हटेगी। वहीं दूसरी तरफ, हमास ने 16 अगस्त को घोषणा की कि वह संघर्ष विराम के दूसरे चरण के रोडमैप के लिए तैयार है, बशर्ते इस्राइल गाज़ा के उस लगभग 60 प्रतिशत हिस्से से अपनी सेना को वापस बुला ले जिस पर उसने अभी कब्जा किया हुआ है।
नई कार्य समूहों का गठन
इस गतिरोध के बीच, इस्राइल और अमेरिका के नेतृत्व वाले 'बोर्ड ऑफ पीस' ने, जिसमें टोनी ब्लेयर और निकोलॉय म्लादेनोव भी शामिल हैं, दो कार्य समूहों का गठन करने का फैसला किया है। पहला समूह क्षेत्र के निरस्त्रीकरण और हथियारों को हटाने पर ध्यान देगा, जबकि दूसरा समूह सार्वजनिक स्वास्थ्य, विशेष रूप से स्वच्छता और साफ पानी की समस्या पर काम करेगा। जेरेड कुशनर ने यह भी बताया कि एक अमेरिकी जनरल की देखरेख में अगले 30 दिनों के भीतर हथियारों को हटाने और सुरंग नेटवर्क को नष्ट करने की दिशा में कुछ प्रगति हो सकती है। मिस्र, कतर और तुर्की जैसे मध्यस्थ देश इस स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे से जुड़े आपातकालीन हालातों पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।