गाजा शांति योजना को इसराइल ने ठुकराया, आठ देशों के विदेश मंत्रियों ने मिलकर की कड़ी निंदा.

गाजा संघर्ष को खत्म करने के लिए बनाई गई शांति योजना को इसराइल द्वारा आधिकारिक तौर पर खारिज किए जाने के बाद दुनिया भर के कई देश आमने-सामने आ गए हैं। 16 अगस्त 2026 को मिस्र, जॉर्डन, संयुक्त अरब अमीरात, कतर, इंडोनेशिया, सऊदी अरब, तुर्किए और पाकिस्तान के विदेश मंत्रियों ने एक साझा बयान जारी किया। इन आठ देशों के प्रमुख नेताओं ने इसराइल के इस फैसले की कड़े शब्दों में निंदा की है और इसे अंतरराष्ट्रीय शांति प्रयासों के लिए एक बड़ा झटका बताया है।
15 सूत्रीय रोडमैप को इसराइल ने नकारा
यह पूरा विवाद उस 15-पॉइंट रोडमैप को लेकर है जिसे गाजा में चल रही हिंसा को रोकने के लिए तैयार किया गया था। इस व्यापक शांति योजना को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव Resolution 2803 के तहत समर्थन भी मिला था। गठबंधन के देशों का कहना है कि इसराइल का इस योजना को स्वीकार करने से मना करना यह साफ दिखाता है कि वहां हालात सुधारने की किसी भी कोशिश को कमजोर किया जा रहा है। इन देशों ने सीधे तौर पर इसराइली सरकार को ही कब्जाए गए इलाकों में लगातार बनी हुई अशांति और हिंसा के लिए जिम्मेदार ठहराया है। इस संबंध में अधिक जानकारी UAE Ministry of Foreign Affairs की आधिकारिक वेबसाइट पर जारी की गई है।
नेतन्याहू का बयान और हमास का रुख
इसराइल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने पिछले दिनों यानी 9 अगस्त को एक बड़ा ऐलान किया था। उन्होंने साफ कर दिया था कि जब तक हमास के पास मौजूद सभी हथियार पूरी तरह से खत्म नहीं कर दिए जाते, तब तक इसराइली सेना गाजा से पीछे नहीं हटेगी। इसके साथ ही उन्होंने फिलिस्तीन को एक अलग देश बनाने के विचार का भी कड़ा विरोध किया। दूसरी तरफ, हमास ने इस शांति रोडमैप को लेकर सकारात्मक संकेत दिए हैं। हमास ने अपनी रजामंदी जताते हुए कहा है कि वह अपने हथियार एक नई तकनीकी समिति को सौंपने के लिए तैयार है, जिसे उस इलाके के प्रशासन की जिम्मेदारी सौंपी जानी है.
अमेरिका की भूमिका और आगे की योजना
आठ देशों के इस साझा बयान में अमेरिका से यह मांग की गई है कि वह इस मामले में सक्रिय रूप से हस्तक्षेप करे। इन देशों का कहना है कि अमेरिका को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि इसराइल इस शांति समझौते के नियमों का पालन करे। इस शांति ढांचे के तहत गाजा से इसराइली सेना को चरणबद्ध तरीके से बाहर करना, वहां एक अंतरराष्ट्रीय शांति सेना तैनात करना और बाद में गाजा प्रशासन की बागडोर एक राष्ट्रीय प्रशासनिक समिति को सौंपना शामिल है। खाड़ी देशों और अन्य सहयोगी देशों की इस संयुक्त अपील के बाद अब देखना यह होगा कि अमेरिका इस मामले में क्या कदम उठाता है और इसराइल का अगला रुख क्या रहता है।