गाजा के चिड़ियाघर में बेहाल हुए जानवर, खाने और मेडिकल सुविधा की भारी कमी से जूझ रहे शेर और चिंपैज़ी.

गाजा में चल रहे संघर्ष के बीच वहां के स्थानीय चिड़ियाघरों में रहने वाले जानवरों की स्थिति बेहद खराब हो चुकी है। 18 अगस्त 2026 तक सामने आई रिपोर्ट के अनुसार, खाने-पीने की चीजों, दवाइयों और पशु चिकित्सा की भारी कमी के कारण ये जानवर गंभीर कुपोषण का शिकार हो रहे हैं। नुसीरात शरणार्थी शिविर के पास स्थित इस चिड़ियाघर में आने वाले बच्चों ने बताया कि वहां मौजूद शेर और चिंपैज़ी बहुत कमजोर और सुस्त नजर आ रहे हैं, जिन्हें सही खुराक और टीके तक नहीं मिल पा रहे हैं।
महमूद गोमा की संघर्ष भरी कहानी और जानवरों की सुध
चिड़ियाघर के मालिक महमूद गोमा इन बेजुबान जानवरों की जान बचाने की कोशिश में लगातार जुटे हुए हैं। गोमा पहले रफाह में एक चिड़ियाघर चलाते थे, लेकिन 2024 में इजरायली सैन्य अभियानों के कारण उन्हें अपने बचे हुए जानवरों के साथ वहां से हटना पड़ा और इस साल की शुरुआत में उन्होंने नुसीरात में फिर से चिड़ियाघर शुरू किया। गोमा ने बताया कि युद्ध के दौरान इन जानवरों की जान बचाना ही उनकी सबसे बड़ी प्राथमिकता रही है। उन्होंने याद किया कि जब वे रफाह से भागने पर मजबूर हुए थे, तब उन्हें तीन शेर, कई मगरमच्छ और अफ्रीकी शुतुरमुर्ग वहीं छोड़ने पड़े थे। जब वे महीनों बाद वहां लौटे, तो उन्हें केवल मगरमच्छों और शुतुरमुर्गों की हड्डियां मिलीं और तीनों शेर गायब हो चुके थे।
वेटनरी एक्सपर्ट्स की चेतावनी और मानसिक तनाव
पशु चिकित्सा विशेषज्ञों ने इन हालातों को बेहद खतरनाक बताया है। पशु चिकित्सक निदाल फadel ने कहा कि जानवरों को खाने के लिए फ्रोजन मीट देना एक बड़ी आपदा और गलत न्यूट्रिशिनल प्लान है, क्योंकि इन जानवरों के नेचुरल विकास के लिए ताजा शिकार की जरूरत होती है। इसके अलावा, एनिमल वेलफेयर ऑर्गेनाइजेशन 'फोर पाउस' के वेटरनेरियन अमीर खलील ने बताया कि लगातार होने वाली बमबारी के कारण शेरों को बहुत ज्यादा मानसिक तनाव झेलना पड़ रहा है, क्योंकि ये जानवर उन पर्यावरणीय बदलावों को भी भांप लेते हैं जो इंसानों को आसानी से महसूस नहीं होते हैं।
युद्ध के बीच बच्चों के लिए एकमात्र राहत
इन तमाम डरावने हालातों के बीच भी यह चिड़ियाघर युद्ध की विभीषिका झेल रहे मानसिक रूप से परेशान बच्चों के लिए एक राहत की छोटी सी जगह बना हुआ है। युद्ध से पहले गाजा में exotic जानवरों वाले कई चिड़ियाघर हुआ करते थे, लेकिन अब इस इलाके में इंसानों और जानवरों दोनों के लिए भोजन जुटाना बहुत मुश्किल हो गया है। ताजा रिपोर्टों के अनुसार, इजरायली सेना की तरफ से इन चिड़ियाघरों जैसे नागरिक ठिकानों पर पड़े असर को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।