GCC ने किया इसराइली सेटलमेंट प्लान का विरोध, वेस्ट बैंक में विस्तार योजनाओं को बताया अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ

खाड़ी सहयोग परिषद यानी GCC ने कब्जे वाले वेस्ट बैंक में इसराइल की तरफ से चलाई जा रही बस्तियों के विस्तार की योजनाओं पर कड़ी आपत्ति जताई है और इसे पूरी तरह से खारिज कर दिया है। GCC के महासचिव Jasem Mohamed Albudaiwi ने एक औपचारिक बयान जारी कर बताया कि इसराइली सरकार की तरफ से उठाए जा रहे ये कदम, खासकर चर्चित E1 सेटलमेंट प्रोजेक्ट, सीधे तौर पर अंतरराष्ट्रीय कानून को चुनौती देते हैं और फलस्तीनी लोगों के अधिकारों को कमजोर करते हैं। महासचिव ने चेतावनी दी कि इस तरह के कदमों से क्षेत्र में शांति की उम्मीदों को बड़ा झटका लग रहा है और स्वतंत्र फलस्तीनी राष्ट्र के निर्माण के अंतरराष्ट्रीय प्रयासों पर भी बुरा असर पड़ रहा है। इस बारे में अधिक जानकारी के लिए आप QNA की आधिकारिक रिपोर्ट देख सकते हैं।
जून 1967 की सीमाओं के आधार पर फलस्तीन के समर्थन में GCC
इस बैठक और बयान के दौरान GCC ने एक बार फिर दोहराया कि वे 4 जून 1967 की सीमाओं के आधार पर, जिसकी राजधानी East Jerusalem होगी, फलस्तीनी लोगों के अपनी जमीन पर संप्रभुता के अधिकार का समर्थन करते हैं। यह पूरा रुख अरब शांति पहल के नियमों के अनुसार ही तय किया गया है। खाड़ी देशों का साफ कहना है कि फलस्तीनी नागरिकों के हक के बिना मध्य पूर्व में स्थायी शांति संभव नहीं है। इस तरह का सख्त रुख तब सामने आया जब इसराइली सरकार ने जेरूसलम के पास E1 क्षेत्र में 1,200 से ज्यादा नए आवास इकाइयों के निर्माण के लिए टेंडर मंगाए। यह पूरा फैसला अक्टूबर के आखिर में होने वाले इसराइली चुनावों से ठीक पहले लिया गया है, जिससे वहां राजनीतिक माहौल और ज्यादा गरमा गया है। इस चुनावी समय और निर्माण योजनाओं से जुड़े घटनाक्रम को आप WAM पर पढ़ सकते हैं।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ा इसराइली प्रोजेक्ट का विरोध
सिर्फ खाड़ी देश ही नहीं बल्कि दुनिया भर के बड़े देशों ने भी इस प्रोजेक्ट के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद कर दी है। यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष Ursula von der Leyen ने इन निर्माण टेंडरों को पूरी तरह से अस्वीकार्य करार दिया है। इसके अलावा पश्चिमी देशों का एक बड़ा समूह, जिसमें France, Germany, Italy, United Kingdom, Norway, Canada और Netherlands शामिल हैं, उन्होंने साफ चेतावनी दी है कि जो भी कंपनियां इस E1 प्रोजेक्ट में हिस्सा लेंगी, उन्हें कानूनी और साख से जुड़े गंभीर परिणामों का सामना करना पड़ सकता है। संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार कार्यालय ने भी वेस्ट बैंक में बढ़ते कब्जे के रुझान और बस्तियों से जुड़े लोगों की हिंसा पर गहरी चिंता जताई है। वहीं दूसरी तरफ जापान सरकार ने भी इसराइल से अपील की है कि वह अपनी सभी बस्तियों की गतिविधियों को पूरी तरह से रोक दे। इस अंतरराष्ट्रीय विरोध और बस्तियों से जुड़ी हिंसा की पूरी जानकारी के लिए QNA News पर विजिट कर सकते हैं।