Gulf Countries: खाड़ी देशों में फंसी भारतीय महिलाओं के लिए बड़ी राहत, सरकार ने बनाए सात वन-स्टॉप सेंटर

खाड़ी देशों में काम करने वाली भारतीय महिलाओं की सुरक्षा और उनकी परेशानियों को दूर करने के लिए भारत सरकार ने एक बहुत बड़ा कदम उठाया है। विदेश मंत्रालय ने संसद को दी जानकारी में बताया कि गल्फ देशों में रहने वाली भारतीय महिलाओं की मदद के लिए कुल सात वन-स्टॉप सेंटर बनाए गए हैं। इन सेंटर्स का मुख्य मकसद उन महिलाओं को तुरंत और सही समय पर सहायता देना है जो किसी भी तरह की मुसीबत या संकट में फंसी हुई हैं। इन सेंटर्स के खुलने से खाड़ी देशों में नौकरी करने वाली हमारी बहनों और बेटियों को बहुत बड़ा सहारा मिलेगा और वे खुद को वहां अकेला महसूस नहीं करेंगी।
इन सात प्रमुख शहरों में खुले हैं नए सेंटर
भारत सरकार द्वारा बनाए गए ये सातों वन-स्टॉप सेंटर खाड़ी देशों के प्रमुख शहरों में शुरू किए गए हैं। इन सेंटर्स की सूची में बहरीन की राजधानी मनामा, ओमान की राजधानी मस्कट, कतर की राजधानी दोहा, सऊदी अरब की राजधानी रियाद और जेद्दा, संयुक्त अरब अमीरात यानी यूएई का दुबई और कुवैत शामिल हैं। इन सभी जगहों पर भारतीय महिलाएं अब सीधे जाकर अपनी समस्या बता सकती हैं और तुरंत मदद पा सकती हैं। सरकार ने इन सभी जगहों पर काम करने वाली महिलाओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यह ठोस व्यवस्था की है ताकि किसी भी अनहोनी या धोखाधड़ी से समय रहते निपटा जा सके।
किन-किन समस्याओं का मिलेगा समाधान
विदेश मंत्रालय के अनुसार, इन वन-स्टॉप सेंटर्स में महिलाओं की हर प्रकार की समस्याओं का समाधान किया जाएगा। अगर किसी महिला का कोई एम्प्लॉयमेंट विवाद है, सैलरी नहीं मिल रही है, या फिर किसी मालिक ने उसका पासपोर्ट अपने पास रख लिया है, तो ये सेंटर उसकी पूरी मदद करेंगे। इसके अलावा शोषण, घरेलू हिंसा, दफ्तर में होने वाली परेशानी, कानूनी दिक्कतें, पुलिस की सहायता, मेडिकल जरूरतें और मानसिक तनाव यानी साइकोलॉजिकल डिस्ट्रेस जैसी तमाम परेशानियों में ये सेंटर काम आएंगे। हर सेंटर पर 24/7 इमरजेंसी हेल्पलाइन, मेडिकल और पुलिस की मदद, कानूनी सहायता, काउंसलिंग और पूरा सामाजिक-मानसिक समर्थन दिया जा रहा है।
महिला कामगारों के लिए कड़े किए गए नियम
खाड़ी देशों में भारतीय महिलाओं के साथ होने वाली धोखाधड़ी को रोकने के लिए सरकार ने नियमों में भी बड़ा बदलाव किया है। अब नए नियमों के मुताबिक महिला कामगारों की भर्ती केवल सरकारी रिक्रूटमेंट एजेंसियों के जरिए ही की जा सकती है या फिर ऐसे विदेशी नियोक्ताओं के जरिए जो भारतीय दूतावासों या मिशनों के पास रजिस्टर्ड हैं। विदेशी नियोक्ताओं को अब संबंधित भारतीय मिशन के पास 2,500 अमेरिकी डॉलर की वित्तीय गारंटी यानी फाइनेंशियल डिपॉजिट जमा कराना अनिवार्य कर दिया गया है। इसके साथ ही काम करने के लिए एम्प्लॉयमेंट कॉन्ट्रैक्ट का अटेस्टेड होना भी बहुत जरूरी कर दिया गया है ताकि कोई भी कंपनी या एजेंट महिलाओं के साथ धोखाधड़ी न कर सके।
पहले भी मिल चुकी है कई महिलाओं को मदद
सरकार ने संसद में आंकड़े देते हुए बताया कि इन सेंटर्स के जरिए पहले ही कई महिलाओं की जान बचाई जा चुकी है और उन्हें सुरक्षित वापस लाया गया है। मार्च 2026 में सरकार ने बताया था कि ओमान की राजधानी मस्कट में स्थित वन-स्टॉप सेंटर में फंसे हुए 88 भारतीय महिला श्रमिकों की मदद की गई और उन्हें वापस लाने की प्रक्रिया शुरू की गई। इसी तरह यूएई में भी अबू धाबी स्थित भारतीय मिशन स्थानीय अधिकारियों के साथ मिलकर एक भारतीय महिला की सकुशल घर वापसी के प्रयास में जुटा हुआ है। सरकार ने खाड़ी देशों में काम करने वाली सभी भारतीय महिलाओं को सलाह दी है कि वे किसी भी संकट के समय सिर्फ प्राइवेट एजेंटों या नियोक्ताओं पर भरोसा न करें, बल्कि सीधे भारतीय दूतावास, कंसुलेट, वन-स्टॉप सेंटर या सरकार के आधिकारिक पोर्टल्स पर संपर्क करें।