Gulf News: होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव के बाद गल्फ देशों ने शुरू किए नए रास्ते, तेल सप्लाई के लिए उठाए गए बड़े कदम।

गल्फ देशों ने होर्मुज जलडमरूमध्य में लगातार बढ़ते तनाव और ऊर्जा सुरक्षा के खतरों को देखते हुए अब वैकल्पिक एनर्जी रूट तलाशने पर तेजी से काम शुरू कर दिया है। ऐतिहासिक रूप से यह जलमार्ग दुनिया के कुल कच्चे तेल के निर्यात का 20% हिस्सा संभालता था और रोजाना यहाँ से लगभग 2 करोड़ बैरल तेल निकलता था, लेकिन अब यहाँ यातायात बहुत धीमा हो गया है। मौजूदा हालात को देखते हुए आम जनता और नौकरीपेशा लोगों के मन में भी एनर्जी संकट को लेकर चिंता बढ़ रही है कि आने वाले दिनों में इसका असर रोजमर्रा की जिंदगी पर कैसे पड़ेगा।
ईरान का दावा और अमेरिका की प्रतिक्रिया
तारीख 12 अगस्त 2026 तक के हालातों के मुताबिक, ईरान ने दावा किया है कि होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह से बंद कर दिया गया है, जबकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इस पर पूर्ण नियंत्रण होने की बात कही है। द पर्शियन गल्फ स्ट्रेट अथॉरिटी ने साफ किया है कि जब तक ईरान की शर्तें नहीं मानी जाती हैं, तब तक यह रास्ता बंद रहेगा। हालांकि अमेरिकी सचिव क्रिस राइट ने 11 अगस्त को जानकारी दी थी कि अमेरिकी सेना और गल्फ देशों के आपसी सहयोग से रोजाना लगभग 90 लाख बैरल तेल इस रास्ते से बाहर निकाला जा रहा है। इसके अलावा अन्य वैकल्पिक रास्तों की मदद से कुल तेल का प्रवाह लगभग 1 करोड़ 50 लाख बैरल प्रति दिन तक पहुंच गया है, जो साल 2025 के 1 करोड़ 98 लाख 70 हजार बैरल प्रतिदिन के आंकड़े से अभी भी कम है।
ईरान की मांगें और कतर की मध्यस्थता
पिछले कई महीनों से चल रहे संघर्ष और अमेरिकी नेवल नाकाबंदी की वजह से यह रुकावटें आई हैं। ईरान की मांग है कि नाकाबंदी हटाई जाए, प्रतिबंध समाप्त किए जाएं, रोके गए पैसे को रिलीज किया जाए, युद्ध बंद हो और नुकसान की भरपाई की जाए, तभी इस रास्ते को फिर से खोला जाएगा। ईरान के सुरक्षा अधिकारी मोहम्मद बागेर जोलघाद्र ने इन शर्तों को सबसे ऊपर बताया है, वहीं संसद सदस्य अली रेजा सालिमी ने इस जलमार्ग को परमाणु बम से भी ज्यादा कीमती बताया है। इन सबके बीच कतर ने ईरान और ओमान के बीच बातचीत कराने में अहम भूमिका निभाई है और एक प्रस्ताव रखा है जिसके तहत जहाज उत्तर में ईरान के रास्ते से आ सकें और दक्षिण में ओमान के रास्ते से बाहर जा सकें।
सऊदी अरब और यूएई द्वारा वैकल्पिक बुनियादी ढांचा
ईरान के लंबे समय तक नियंत्रण की संभावना को देखते हुए गल्फ देशों ने अपने इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करना शुरू कर दिया है। सऊदी अरब ने रेड सागर पर बने अपने East-West Pipeline to Yanbu का इस्तेमाल शुरू कर दिया है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष यानी IMF के अप्रैल-मई 2026 के आंकड़ों के मुताबिक रेड सागर के जरिए होने वाले शिपमेंट ने गल्फ के रुके हुए तेल का लगभग 61% हिस्सा संभाल लिया है। वहीं यूएई फुजाइराह के लिए अपने ADCOP यानी अबू धाबी क्रूड ऑयल पाइपलाइन का उपयोग कर रहा है, हालांकि ईरान के पास होने के कारण इस बंदरगाह पर सुरक्षा का थोड़ा जोखिम बना हुआ है। इसके अलावा सऊदी अरब और ओमान ने 12 अगस्त 2026 को एम्प्टी क्वार्टर लैंड रूट के लिए एक क्रॉस-बॉर्डर फ्रेट डील पर भी हस्ताक्षर किए हैं, जिससे सप्लाई चेन और बेहतर हो सके। इराक भी तुर्की और सीरिया के रास्ते नए निर्यात मार्ग तलाश रहा है जो रोजाना 20 लाख बैरल तेल संभाल सकते हैं, साथ ही जॉर्डन के अकाबा बंदरगाह के लिए पाइपलाइन पर भी बातचीत जारी है। गोल्डमैन सैक्स का अनुमान है कि साल 2028 तक ये नए रास्ते गल्फ के कुल तेल निर्यात का 60% हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य से बाहर निकालने में कामयाब हो जाएंगे।
सुरक्षा खतरे और अन्य घटनाएं
यह सुरक्षा संकट केवल होर्मुज तक सीमित नहीं है, बल्कि गल्फ देशों में गैर-सैन्य बुनियादी ढांचे पर भी लगातार हमले हो रहे हैं। हाल की घटनाओं में 12 अगस्त 2026 को गल्फ ऑफ ओमान में अमेरिकी नौसेना ने एक पनामा-ध्वज वाले कार्गो जहाज पर गोलीबारी की जो अमेरिकी नाकाबंदी को पार करने की कोशिश कर रहा था। इसके अलावा बाब अल-मदब जलडमरूमध्य में ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों के हमले में 6 लोगों की मौत हो गई और 10 लोग घायल हो गए। वर्तमान में इस जलमार्ग का बंद होना साल 1973 के तेल प्रतिबंध से लगभग तीन गुना बड़ा माना जा रहा है, जिससे यह साफ होता है कि डाइवर्सिफाइड और मजबूत सप्लाई चेन तैयार करना कितना जरूरी हो गया है।