H-1B Visa Fee Hike: अमेरिका में एच-1बी वीज़ा फीस बढ़ने से भारत शिफ्ट हो सकते हैं टेक जॉब्स, जानिए पूरी बात.

Nura Basta26 August 20263 min read54 viewsIndia
H-1B Visa Fee Hike: अमेरिका में एच-1बी वीज़ा फीस बढ़ने से भारत शिफ्ट हो सकते हैं टेक जॉब्स, जानिए पूरी बात.

अमेरिका के होमलैंड सिक्योरिटी डिपार्टमेंट यानी US Department of Homeland Security की तरफ से एक नया प्रस्ताव सामने आया है, जिसके तहत H-1B visa के लिए आवेदन करने पर USD 103,265 यानी करीब एक लाख तीन हजार डॉलर से ज्यादा का अतिरिक्त शुल्क लगाया जा सकता है। इस संभावित और भारी-भरकम फीस बढ़ोतरी के बाद से यह चिंता लगातार बढ़ती जा रही है कि आने वाले समय में बड़ी कंपनियां अमेरिका में कर्मचारियों को बुलाने के बजाय भारत में मौजूद ग्लोबल केपबिलिटी सेंटर्स यानी Global Capability Centres (GCCs) के जरिए काम करवाना ज्यादा पसंद कर सकती हैं। जाने-माने अर्थशास्त्री और संयुक्त राष्ट्र के पूर्व सलाहकार Santosh Mehrotra ने इस बात पर रोशनी डाली है कि इतनी ज्यादा लागत बढ़ने की वजह से टेक कंपनियां भारतीय टैलेंट को सीधे अमेरिका शिफ्ट करने के बजाय रिमोट या भारत से ही काम कराने पर जोर देंगी।

कहाँ अटका है नया प्रस्ताव और कब होगा लागू

यह नया नियम फिलहाल व्हाइट हाउस के ऑफिस ऑफ इंफॉर्मेशन एंड रेगुलेटरी अफेयर्स यानी Office of Information and Regulatory Affairs की समीक्षा के दायरे में चल रहा है। इस प्रस्तावित नियम का असर उन सभी कैप-सब्जेक्ट याचिकाओं पर पड़ेगा, जिनमें वे 20,000 वीजा भी शामिल हैं जो अमेरिका से मास्टर डिग्री या उससे ऊंची पढ़ाई पूरी करने वाले लोगों के लिए रिजर्व रखे जाते हैं। नागरिक और आव्रजन सेवा के प्रवक्ता Zach Kahler ने इस बारे में जानकारी देते हुए बताया है कि इस भारी फीस का मुख्य मकसद संघीय आव्रजन कार्यक्रमों की जाँच-परख, दस्तावेजों के सत्यापन और उन्हें सपोर्ट करने में आने वाले खर्चों की भरपाई करना है। इस नए नियम को आधिकारिक तौर पर August 25, 2026 को फेडरल रजिस्टर में प्रकाशित किया जाना तय किया गया है, जिसके बाद इस पर आम जनता से सुझाव और टिप्पणियां मांगने के लिए एक निश्चित समय अवधि यानी पब्लिक कमेंट पीरियड शुरू किया जाएगा। हालांकि, विश्वविद्यालयों और गैर-लाभकारी शोध संस्थानों की तरफ से दायर की जाने वाली कैप-एक्जेम्प्ट याचिकाएं इस नियम के दायरे से बाहर रहेंगी और उन पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा।

किन लोगों पर पड़ेगा सबसे ज्यादा असर

अर्थशास्त्री Santosh Mehrotra ने यह भी साफ किया है कि हालांकि यह फीस का नियम सभी प्रकार के आवेदकों पर लागू होगा, लेकिन इसका सबसे बुरा और बड़ा असर भारतीय प्रोफेशनल्स पर ही पड़ेगा क्योंकि वे कुल एच-1बी वीजा धारकों में सबसे बड़ा हिस्सा हैं। उन्होंने आगे बताया कि इस पूरी आर्थिक मार का बोझ मुख्य रूप से अमेरिका की उन कंपनियों पर गिरेगा जो सबसे ज्यादा संख्या में इस वीजा के जरिए लोगों को नौकरी पर रखती हैं। इस पूरे घटनाक्रम से पहले प्रशासन की तरफ से वीजा कार्यक्रम में कई तरह के बदलाव करने के प्रयास किए गए थे, जिसमें उन नियोक्ताओं पर कड़ी नजर रखना भी शामिल था जिनके खिलाफ पहले कभी नियम तोड़ने के मामले दर्ज किए गए थे और साथ ही तीसरे पक्ष की कार्य साइटों पर निगरानी को और ज्यादा मजबूत बनाना भी शामिल था। इस ताजा USD 103,265 फीस को लेकर यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि यह उस पुरानी USD 100,000 वाली फीस से बिल्कुल अलग है जिसे इस साल जून 2026 में एक फेडरल कोर्ट की तरफ से रद्द कर दिया गया था। इस बारे में अधिक जानकारी के लिए आप ANI News की रिपोर्ट देख सकते हैं।

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