गाजा में संघर्षविराम को हमास की हरी झंडी, अमेरिका के दबाव के बावजूद इसराइल के रुख पर फंसा पेंच.

गाजा में चल रहे युद्ध को रोकने के लिए एक बड़ा राजनीतिक और कूटनीतिक कदम उठाया गया है। हमास ने आधिकारिक तौर पर गाजा संघर्षविराम समझौते के दूसरे चरण के लिए 15 सूत्रीय रोडमैप को मंजूरी दे दी है। इस प्रस्ताव को मूल रूप से अमेरिकी नेतृत्व वाले 'बोर्ड ऑफ पीस' द्वारा 31 जुलाई 2026 को पेश किया गया था। इस बड़े फैसले के बाद अब मध्यपूर्व की राजनीति में हलचल तेज हो गई है और पूरी दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि आगे क्या कदम उठाए जाएंगे।
काहिरा में हुई बैठकों के बाद लिया गया फैसला
मिस्र, कतर और तुर्की के मध्यस्थों के साथ काहिरा में लंबी बातचीत हुई। इसके बाद हमास के नेता खलील अल-हय्या ने इस समझौते को स्वीकार करने की आधिकारिक पुष्टि की। हमास की तरफ से यह मांग की गई है कि इलाके में स्थायी रूप से संघर्षविराम लागू किया जाए, इस्राइली सेना पूरी तरह से पीछे हटे और गाजा के प्रशासन के लिए एक राष्ट्रीय समिति का गठन किया जाए। हमास ने अमेरिका से यह भी अपील की है कि वह इस बात को सुनिश्चित करे कि इसराइल अपनी जिम्मेदारियों को पूरा करे, क्योंकि हमास ने पहले चरण की शर्तों का पूरी तरह से पालन किया है।
इसराइल का पुराना रुख और नेतन्याहू का विरोध
इस पूरी कूटनीतिक पहल को आगे बढ़ाने में अमेरिकी दूत जेड कुशनर और ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर अहम भूमिका निभा रहे हैं। हालांकि, इसराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इस योजना को पहले ही खारिज कर दिया था। नेतन्याहू का साफ कहना है कि जब तक हमास को पूरी तरह से हथियार डालने के लिए मजबूर नहीं किया जाता, तब तक इस्राइली सेना पीछे नहीं हटेगी। प्रधानमंत्री नेतन्याहू इस प्रस्ताव को किसी भी हाल में स्वीकार करने के पक्ष में नहीं हैं।
मैदान पर तनाव और आने वाली बैठकें
समझौते की कोशिशों के बीच भी जमीन पर हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं। हाल ही में खान यूनिस और नुसीरात में इस्राइली हवाई हमले दर्ज किए गए हैं, जिससे स्थिति और गंभीर हो गई है। इसी गतिरोध को खत्म करने के लिए अमेरिकी दूत जेड कुशनर आगामी 17 अगस्त को प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से मुलाकात करेंगे। इस बैठक में आगे के रास्तों पर चर्चा की जाएगी ताकि किसी तरह की सहमति बनाई जा सके। दूसरी तरफ, तुर्की और अन्य सात देशों ने इसराइल द्वारा शांति योजना के विरोध की निंदा की है और चेतावनी दी है कि इस तरह का विरोध क्षेत्रीय स्थिरता के लिए खतरा पैदा कर रहा है।