Hezbollah ने ठुकराया लेबनान-इजराइल समझौता, सरकार पर लगाया देश के साथ गद्दारी का आरोप

लेबनान और इजराइल के बीच प्रस्तावित फ्रेमवर्क समझौते को लेकर राजनीतिक सरगर्मी काफी ज्यादा बढ़ गई है। Hezbollah के प्रमुख Naim Qassem ने सार्वजनिक रूप से इस डील को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने लेबनान सरकार के इस कदम को आत्मसमर्पण करार दिया और कहा कि यह देश की संप्रभुता का खुला उल्लंघन है। उनके अनुसार, बेरूत में बैठी सरकार देश की रक्षा करने के बजाय केवल प्रतिरोध को दबाने पर ध्यान दे रही है, जबकि इजराइल दक्षिणी लेबनान पर अपना कब्जा जमाए बैठा है।
मानवीय संकट और जंग के हालात
क्षेत्र में चल रहे संघर्ष की वजह से आम लोगों का जीवन नर्क बन गया है और हालात बेहद गंभीर हो चुके हैं। आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार, गत 2 मार्च से शुरू हुए इजरायली हमलों में अब तक 4,335 लोगों की जान जा चुकी है। इसके अलावा 12,000 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं, जबकि एक मिलियन से ज्यादा नागरिकों को अपना घर छोड़कर भागना पड़ा है। संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं इस मोर्चे पर लगातार नजर बनाए हुए हैं, जिसकी अधिक जानकारी ReliefWeb Report में दी गई है।
राजनयिक कोशिशें और अमेरिका की भूमिका
एक तरफ जहां हिजबुल्लाह इस समझौते के सख्त खिलाफ है, वहीं लेबनान के प्रधानमंत्री Nawaf Salam और अन्य वरिष्ठ अधिकारी अमेरिकी प्रतिनिधियों के साथ लगातार बातचीत कर रहे हैं। वे इजराइल से अपनी सेना को वापस बुलाने के लिए एक निश्चित समय सीमा तय करने की मांग कर रहे हैं। दूसरी ओर, इजराइल के रक्षा मंत्री Israel Katz ने साफ कर दिया है कि जब तक हिजबुल्लाह को पूरी तरह से हथियार डालने के लिए मजबूर नहीं किया जाता, तब तक सैन्य अभियान लगातार जारी रहेगा। इजराइल अब रणनीतिक रूप से अली ताहेर रिज की तरफ आगे बढ़ने की योजना बना रहा है। इन तमाम तनावों के बीच, अमेरिका ने आने वाले सितंबर के महीने में रोम में एक नई शांति वार्ता आयोजित करने की घोषणा की है, जिसमें सैन्य तैनाती की निगरानी और गैर-सरकारी संगठनों के हथियारों को हटाने के मुद्दों पर चर्चा की जाएगी।