हॉर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही भारी गिरावट, ईरान और अमेरिका के तनाव से वैश्विक व्यापार पर असर

हॉर्मुज जलडमरूमध्य से होने वाली जहाजों की आवाजाही में हाल ही में भारी गिरावट दर्ज की गई है। इस इलाके में लगातार हो रहे टैंकर हमलों और अमेरिका तथा ईरान के बीच चल रहे तनाव के कारण स्थिति काफी गंभीर बनी हुई है। आंकड़ों के अनुसार इस रास्ते पर जहाजों का आना-जाना लगभग बंद सा हो गया है जिससे आम लोगों और कारोबारियों की चिंताएं बढ़ गई हैं।
जहाजों की आवाजाही में भारी कमी
ट्रैकिंग फर्म Kpler के डेटा से पता चलता है कि 15 अगस्त को इस जलडमरूमध्य से केवल 5 कमोडिटी पोत ही गुजर पाए थे। इसके बाद स्थिति और ज्यादा खराब हो गई और 16 अगस्त को एक भी जहाज के गुजरने की खबर नहीं आई। पिछले हफ्ते के आखिर में इसी रास्ते से 31 जहाजों की आवाजाही दर्ज की गई थी, जिसके मुकाबले यह गिरावट बहुत बड़ी है। यह अनिश्चितता तब और बढ़ गई जब यूएई द्वारा संचालित तीन जहाजों पर हमलों की रिपोर्ट्स सामने आईं। इसके अलावा UK Maritime Trade Operations ने भी एक बल्क कैरियर पर प्रोजेक्टाइल हमले की पुष्टि की है।
ईरान और ओमान का नया समझौता
इस बीच, तनाव को कम करने के लिए ईरान और ओमान ने एक स्वतंत्र शिपिंग रूट समझौते का ऐलान किया है। इस समझौते का मुख्य उद्देश्य समुद्री संप्रभुता को बनाए रखना है, लेकिन जमीन पर हालात अब भी बहुत संवेदनशील बने हुए हैं। ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araqchi और अन्य ईरानी अधिकारियों का कहना है कि पूरी तरह से कमर्शियल गतिविधियां तभी शुरू हो पाएंगी जब अमेरिका अपनी नौसैनिक नाकाबंदी को हटाएगा। इसके साथ ही उन्होंने अमेरिकी सैन्य गतिविधियों को रोकने और कथित समझौतों के उल्लंघन के लिए मुआवजे की मांग भी की है।
अंतरराष्ट्रीय नियमों और सुरक्षा पर असर
दूसरी तरफ, अमेरिका इस बात पर अड़ा हुआ है कि यह जलडमरूमध्य एक अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग है। अमेरिका ने ईरान द्वारा ट्रांजिट फीस वसूलने या किसी भी तरह के परमिट की शर्तों को लागू करने के प्रयासों को साफ तौर पर खारिज कर दिया है। इस पूरे विवाद और संघर्ष के शुरू होने के बाद से अब तक कुल 65 पोत की घटनाएं और 17 नाविकों की मौत की खबरें आ चुकी हैं। अंतरराष्ट्रीय संगठन, जिसमें IMO भी शामिल है, लगातार इस बात पर जोर दे रहे हैं कि वैश्विक व्यापार के लिए बिना किसी भेदभाव के जहाजों की आवाजाही सुचारू रूप से चलती रहनी चाहिए ताकि आम जनता और बाजार पर इसका बुरा असर न पड़े।