Yemen Port Attack: मोखा पोर्ट पर हूती मिलीशिया का खतरनाक हमला, चार बैलिस्टिक मिसाइलें गिरने से एक व्यक्ति की मौत और कई घायल

यमन के मोखा पोर्ट पर शुक्रवार, 14 अगस्त 2026 को हूती मिलीशिया की तरफ से एक बड़ा हमला किया गया, जिसमें इंसान की जान जाने के साथ-साथ भारी नुकसान भी हुआ है। यमन की आर्म्ड फोर्सेस ने इस बात की जानकारी दी है कि इस हमले में चार बैलिस्टिक मिसाइलों का इस्तेमाल किया गया था, जो सीधे उस डॉक पर जाकर गिरीं जहां एक ड्रेजर मशीन नेविगेशन चैनल को गहरा करने का काम कर रही थी। शुरुआती रिपोर्ट्स में यह बात सामने आई है कि इस दुखद घटना में कम से कम एक व्यक्ति की मौत हो गई है और तीन अन्य लोग घायल हो गए हैं। इस पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए सरकार की तरफ से एक कमेटी बनाई गई है, जिसे तुरंत वहां भेज दिया गया है ताकि सिविल और सर्विस सुविधाओं को पहुंचे नुकसान का पूरा आंकलन किया जा सके।
क्षेत्र में बढ़ता तनाव और सुरक्षा बलों की कार्रवाई
यह हमला क्षेत्र में चल रहे फौजी तनाव का ही एक हिस्सा है, जो लगातार गंभीर रूप लेता जा रहा है। यमन के सुरक्षा बलों ने बहादुरी दिखाते हुए हूती विद्रोहियों द्वारा दागे गए कुल 44 ड्रोनों में से 15 ड्रोनों को हवा में ही नष्ट कर दिया। इसके अलावा, वाहदjah के समंदर तट पर हूती गुट की तरफ से किए गए एक नेवल हमले को भी नाकाम कर दिया गया, जिसमें विस्फोटक से भरी छह नावों का इस्तेमाल किया जा रहा था। इस जवाबी कार्रवाई में सुरक्षा बलों ने आठ हूती लड़ाकों को ढेर कर दिया है, जिससे विद्रोहियों को करारा झटका लगा है। मोखा पोर्ट के डायरेक्टर डॉ. अब्दुलमलिक अल-शराबी ने इस हमले की कड़ी निंदा करते हुए इसे इंटरनेशनल कानून का खुला उल्लंघन बताया है, क्योंकि इससे आम नागरिकों और जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाया जा रहा है.
यूएन के विशेष दूत ने जताई बड़ी चिंता
पोर्ट अधिकारियों के अनुसार, इस हमले से पहले भी इसी बंदरगाह को लगभग 9 से 10 अगस्त के बीच निशाना बनाया गया था। उस पुराने हमले में सात लोगों की जान चली गई थी और 30 लोग घायल हो गए थे। लगातार हो रहे इन हमलों की वजह से यमन में हालात एक बार फिर खराब होने लगे हैं। इस स्थिति को देखते हुए यूएन के स्पेशल दूत हंस ग्रुंडबर्ग ने पहले ही गहरी चिंता जताई थी और चेतावनी दी थी कि अगर हालात ऐसे ही रहे तो यह देश एक बार फिर से बड़े पैमाने पर आपसी संघर्ष की तरफ लौट सकता है, जिससे आम लोगों की मुश्किलें और ज्यादा बढ़ जाएंगी.