सऊदी अरब पर हौथी विद्रोहियों का बड़ा दावा, तेल जहाजों और रिफाइनरी को निशाना बनाने की बात कही.

लाल सागर और अरब सागर के समुद्री रास्तों पर तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है, जहां हाल ही में एक बड़ी घटना सामने आई है। 19 अगस्त 2026 को हौथी सैन्य प्रवक्ता Yahya Saree ने यह जानकारी दी कि उनके समूह ने 20 जुलाई 2026 से अब तक कुल 48 सऊदी तेल जहाजों को गुजरने से रोक दिया है। इसके अलावा 8 अन्य जहाजों को सफलतापूर्वक निशाना भी बनाया गया है। इस पूरी कार्रवाई से समुद्री व्यापार पर बड़ा असर पड़ा है और सुरक्षा को लेकर चिंताएं काफी बढ़ गई हैं।
हौथी विद्रोहियों के हमले और क्षेत्रिय तनाव
हौथी प्रवक्ता के अनुसार, निशाना बनाए गए जहाजों में से 5 लाल सागर में थे, जबकि 3 जहाज अदन की खाड़ी और अरब सागर में मौजूद थे। जिन 48 जहाजों को वापस लौटने पर मजबूर किया गया, उनमें से 34 को अरब सागर और हिंद महासागर में रोका गया था, और 14 जहाज लाल सागर के इलाके में थे। हौथी समूह का कहना है कि यह कार्रवाई यमन की संप्रभुता की रक्षा के लिए की जा रही है और इसे नाकाबंदी के जवाब में नाकाबंदी का नाम दिया गया है।
इस समूह ने सऊदी अरब के अंदर भी कई सैन्य ठिकानों पर हमले करने का दावा किया है। इसमें मुख्य रूप से Yanbu, Najran, Jazan, Abha और ईस्टर्न प्रोविंस में तेल सप्लाई के ठिकानों का जिक्र किया गया है। इसके अलावा यमन के स्थानीय इलाकों जैसे अल-रुवाइक, अल-अब्र, अल-वादिया, मारिब और अल-मोखा में सऊदी सैन्य तैयारियों के खिलाफ भी 14 ऑपरेशन चलाने की बात कही गई है। मोखा के पास दो सैन्य लैंडिंग जहाजों और दस से ज्यादा नावों को डुबाने का दावा भी किया गया है।
सऊदी अरब की प्रतिक्रिया और शिपिंग नीतियों में बदलाव
हौथी लड़ाकों ने यह भी दावा किया कि उन्होंने एयरस्पेस के नियमों के उल्लंघन का हवाला देते हुए ड्रोन के जरिए सऊदी अरब के जाज़ान शहर में स्थित Aramco रिफाइनरी पर हमला किया। हालांकि सऊदी अधिकारियों की तरफ से इस पर तुरंत कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। दूसरी तरफ शिपिंग डेटा से यह बात सामने आई है कि रियाद सरकार ने अपनी रणनीति बदलते हुए 'डार्क' ट्रांजिट पॉलिसी अपना ली है। इसके तहत जहाजों के ट्रैकिंग सिग्नल बंद कर दिए गए हैं और जहाजों को मिस्र के रास्ते उत्तरी रूट से भेजा जा रहा है।
शिपिंग एनालिटिक्स फर्म Kpler के आंकड़ों के अनुसार, पिछले हफ्ते बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य से 19 कमोडिटी जहाजों ने आवाजाही की थी, जो इस हफ्ते बढ़कर 30 हो गई है, हालांकि इनमें कोई भी सऊदी तेल का जहाज नहीं देखा गया। इस पूरे घटनाक्रम के बीच संयुक्त राष्ट्र के महासचिव Antonio Guterres ने गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि इस तरह की क्षेत्रीय झड़पों से खतरा काफी बढ़ सकता है। साथ ही यमन सरकार के एक मंत्री ने चेतावनी दी है कि हौथी बल बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य के पास के इलाके पर कब्जा करने की साजिश रच रहे हैं। इन सभी समुद्री जोखिमों और ईरान युद्ध के बीच हॉर्मुज जलडमरूमध्य के दोबारा खुलने को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है, जिससे वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतों में तेजी देखने को मिल रही है।