ICC पर अमेरिका का बड़ा एक्शन, इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट के प्रेसिडेंट और सीनियर वकील पर लगाया कड़ा प्रतिबंध.

Sushma Kumari18 August 20262 min read71 viewsWorld
ICC पर अमेरिका का बड़ा एक्शन, इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट के प्रेसिडेंट और सीनियर वकील पर लगाया कड़ा प्रतिबंध.

अंतर्राष्ट्रीय अपराध न्यायालय यानी ICC ने अमरीकी सरकार द्वारा अपने बड़े अधिकारियों पर लगाए गए प्रतिबंधों को लेकर कड़ा ऐतराज़ जताया है। कोर्ट ने मंगलवार, 18 अगस्त 2026 को साफ शब्दों में कहा कि अमरीका का यह कदम दुनिया भर के कानून के नियमों को कमजोर करने का काम करता है। कोर्ट ने यह भी साफ किया कि वह किसी भी दबाव में आने वाला नहीं है और अपने सभी कर्मचारियों के साथ मजबूती के साथ खड़ा रहेगा। अमरीका की तरफ से यह पेनल्टी ICC की अध्यक्ष Tomoko Akane और सीनियर ट्रायल वकील Abdoulaye Seye के खिलाफ लगाई गई है।

अमरीकी राष्ट्रपति के आदेश पर हुई कार्रवाई

यह पूरा मामला उस समय और गरमा गया जब अमरीका ने Executive Order 14203 के तहत इन अधिकारियों पर शिकंजा कसा। इस आदेश पर अमरीकी राष्ट्रपति Donald Trump ने 6 फरवरी 2025 को हस्ताक्षर किए थे। इन नए नियमों के तहत अमरीका में मौजूद इन दोनों अधिकारियों की संपत्तियों को पूरी तरह से फ्रीज कर दिया गया है। इसके अलावा अमरीकी नागरिकों और कंपनियों पर यह रोक लगा दी गई है कि वे इनमें से किसी के साथ भी किसी तरह का पैसों का लेन-देन नहीं कर पाएंगे।

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अमरीकी विदेश मंत्री Marco Rubio ने इस फैसले का बचाव करते हुए अंतर्राष्ट्रीय अदालत को लेकर तीखी बात कही। उन्होंने अदालत को ऐसा संगठन बताया जो पूरी तरह से भ्रष्ट हो चुका है और अपने अधिकारों का गलत इस्तेमाल कर रहा है। विदेश मंत्री का यह भी कहना था कि इन अधिकारियों ने ऐसे देशों के नागरिकों पर मुकदमा चलाने की कोशिश की है जिन्होंने इस कोर्ट के नियमों को कभी माना ही नहीं है। अमरीका के इस कदम की पूरी जानकारी आप White House की आधिकारिक वेबसाइट पर देख सकते हैं.

इज़राइल से जुड़े मामलों के बाद बढ़ा तनाव

अमरीका और इस अंतरराष्ट्रीय अदालत के बीच दूरियां तब और बढ़ गई थीं जब कोर्ट ने नवंबर 2024 में इज़राइल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu और पूर्व रक्षा मंत्री Yoav Gallant के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया था। कोर्ट का हमेशा से यही पक्ष रहा है कि जब देश की अपनी न्याय व्यवस्था किसी गंभीर अपराध पर कार्रवाई करने में असफल रहती है, तब वह दखल दे सकती है। भले ही अमरीका इस कोर्ट का सदस्य नहीं है, फिर भी वहां की सरकार ने अपने सहयोगियों की सुरक्षा का हवाला देते हुए इस कार्रवाई को सही ठहराया है।

इन तमाम पाबंदियों के जवाब में अदालत की तरफ से बयान आया कि न्याय के काम से जुड़े लोगों को बिना किसी डर या धमकी के अपना काम करने की आज़ादी मिलनी चाहिए। कोर्ट की अध्यक्ष Tomoko Akane ने पहले ही दिसंबर महीने में यह स्पष्ट कर दिया था कि अदालत अपने नियमों को लागू करने में किसी भी तरह का दबाव कभी स्वीकार नहीं करेगी। हार्वर्ड लॉ स्कूल के प्रोफेसर Alex Whiting जैसे कानून के जानकारों का मानना है कि अमरीका और द हेग स्थित इस अदालत के बीच चल रहा यह विवाद अब एक नए और खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है।

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