भारत और ऑस्ट्रेलिया की बड़ी मांग, होर्मुज जलडमरूमध्य को तुरंत खोलने की अपील ताकि ऊर्जा संकट से मिले राहत.

भारत और ऑस्ट्रेलिया ने मिलकर पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है और Strait of Hormuz को तुरंत फिर से खोलने की जोरदार मांग की है। बुधवार, 19 अगस्त 2026 को मुंबई में आयोजित IC3 इवेंट के दौरान भारत में ऑस्ट्रेलिया के हाई कमिश्नर Philip Green ने इस बात पर जोर दिया कि दोनों देश अपनी द्विपक्षीय ऊर्जा साझेदारी को और मजबूत करने के लिए लगातार काम कर रहे हैं। उनके मुताबिक यह जलमार्ग दोनों देशों के नागरिकों के साथ-साथ पूरी दुनिया की आर्थिक स्थिरता और ऊर्जा सप्लाई के लिए बहुत ज्यादा जरूरी है, इसलिए इस पर रोक या बाधा को जल्द से जल्द खत्म किया जाना चाहिए ताकि सामान्य कामकाज बहाल हो सके।
भारत और ऑस्ट्रेलिया की मजबूत ऊर्जा साझेदारी
यह रणनीतिक साझेदारी मुख्य रूप से ऊर्जा सुरक्षा पर आधारित है, जिसे प्रधानमंत्री Narendra Modi की जुलाई 2026 की ऑस्ट्रेलिया यात्रा के दौरान औपचारिक रूप दिया गया था। ऑस्ट्रेलिया इस समय भारत को कोयला और LNG (Liquefied Natural Gas) की सप्लाई करने वाला एक बहुत महत्वपूर्ण देश बन गया है और अब दोनों देशों ने इस सहयोग का दायरा बढ़ाते हुए यूरेनियम की सप्लाई को भी इसमें शामिल कर लिया है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार ANI News की रिपोर्ट में यह सामने आया है कि क्षेत्रीय स्थिरता और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर दोनों सरकारें पूरी तरह से गंभीर हैं और आपसी व्यापार तथा सप्लाई चेन को सुरक्षित रखने के लिए लगातार बातचीत कर रही हैं ताकि भविष्य में किसी भी तरह की दिक्कत का सामना न करना पड़े।
समुद्री मार्गों में बदलाव और क्षेत्रीय सुरक्षा
क्षेत्रीय हालात में आए बदलावों की वजह से समुद्री यातायात पर भी काफी असर पड़ा है और रिपोर्ट्स बताती हैं कि संभावित खतरों या दखलंदाजी से बचने के लिए लगभग 80% समुद्री जहाज अब ओमान के रास्ते जाने वाले एक अधिकृत यूएन रूट का इस्तेमाल कर रहे हैं। इसके अलावा पश्चिम एशिया के सुरक्षा माहौल में एक और बड़ा बदलाव तब देखने को मिला जब 7 अगस्त 2026 को सऊदी अरब, तुर्की और पाकिस्तान के बीच 'मक्का पैक्ट' नाम से एक नया रक्षा समझौता साइन हुआ। इन तमाम बदलती हुई क्षेत्रीय परिस्थितियों को देखते हुए रक्षा विश्लेषकों का यह मानना है कि भारत को खाड़ी क्षेत्र में अपने बड़े आर्थिक हितों और व्यापारिक गतिविधियों की सुरक्षा के लिए अपनी सैन्य व सुरक्षा उपस्थिति को और ज्यादा मजबूत करने की जरूरत पड़ सकती है, ताकि वहां रहने वाले प्रवासियों और सप्लाई चेन पर किसी भी तरह का संकट न आए।